अहमदाबाद. गुजरात सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूलों में बच्चों को श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ाने का फैसला लिया है. फर्स्ट फेज में 6वीं से 12वीं तक के बच्चे गीता के श्लोक और मर्म को समझेंगे. इस बात का ऐलान गुरुवार को सरकार की ओर से जारी नई शिक्षा नीति में किया गया. नई शिक्षा नीति के तहत प्रदेश के सभी स्कूल बच्चों को भगवत गीता के सिद्धांत और मूल्य पढ़ाएंगे. इसके साथ ही पहली और दूसरी क्लास के लिए अंग्रेजी सब्जेक्ट शुरू करने का भी फैसला लिया गया है, जिससे बच्चे शुरुआत से ही गुजराती के अलावा अंग्रेजी में भी निपुण हो सकें. नवंबर-दिसंबर में गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसलिए स्कूल सिलेबस में गीता को शामिल करने को चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है.
ये थीं राज्य सरकार की सिफारिशें
– 2022-23 से शुरू हो रहे सेशन में भारतीय संस्कृति और ज्ञान प्रणाली को शामिल किया जाए.
– पहले चरण में भगवद गीता के मूल्यों और सिद्धांतों को कक्षा 6 से 12 तक बच्चों की समझ और रुचि के अनुसार पढ़ाया जाए.
– कक्षा में भगवद गीता का परिचय, 9वीं से 12वीं में श्रीमद्भगवद्गीता को कहानी और पाठ के रूप में पढ़ाएं.
– प्रार्थना में श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ किया जाए.
– स्कूलों में भगवत गीता पर श्लोक ज्ञान, श्लोक पूर्ति, निबंध, नाटक, पेंटिग, क्विज जैसी स्पर्धाएं भी करवाई जाएं.
– 6 से 12 तक के बच्चों के लिए स्टडी मटेरियल (प्रिंटेड, ऑडियो-विजुअल आदि) प्रदान की जाए.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत गीता ज्ञान देने की वजह
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा प्रणाली और शैक्षणिक संस्थानों का मार्गदर्शन करने वाले बुनियादी सिद्धांत बनाए गए हैं. इनमें से एक सिद्धांत छात्रों को भारत की समृद्ध, विविध, प्राचीन और आधुनिक संस्कृति और ज्ञान प्रणालियों के साथ-साथ परंपराओं से गर्व और जुड़ाव महसूस कराने की कोशिश करना है. इसके लिए जरूरी है कि भारतीय संस्कृति की जानकारियों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, जो छात्रों के समग्र विकास में भी सहायक हो.

