

जमशेदपुर के सिदगोड़ा स्थित भास्कर भवन का माहौल शनिवार को गमगीन था, लेकिन उस गम में एक अजीब सी पवित्रता और सम्मान का भाव भरा हुआ था। मौका था भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष एवं प्रखर समाजसेवी स्वर्गीय चंद्रशेखर मिश्रा की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा का। इस सभा में चंद्रशेखर मिश्रा को श्रद्धांजलि देने के लिए हजारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े। नम आंखों और भरे गले से हर किसी ने उन्हें याद किया। यह दृश्य बता रहा था कि उन्होंने राजनीति से ऊपर उठकर सामाजिक जीवन में कितनी गहरी पैठ बनाई थी।
भास्कर भवन में उमड़ा जनसैलाब, हर आंख थी नम
सुबह से ही भास्कर भवन में लोगों का आना शुरू हो गया था। देखते ही देखते परिसर खचाखच भर गया। हालत यह थी कि बैठने की जगह कम पड़ गई और लोग खड़े होकर, गलियारों में खड़े होकर अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दे रहे थे। हजारों की संख्या में पहुंचे इन लोगों में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ विपक्षी दलों के नेता, शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी, समाजसेवी, पत्रकार और आम नागरिक शामिल थे। सभा का संचालन कर रहे वक्ताओं ने जब उनके जीवन प्रसंग सुनाए तो माहौल और भावुक हो गया। कई बुजुर्ग कार्यकर्ता तो अपने आंसू रोक नहीं पाए।
मृदुभाषी स्वभाव और सादगी बनी पहचान
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि चंद्रशेखर मिश्रा का मृदुभाषी स्वभाव, सामाजिक सौम्यता, सहज व्यवहार और सादगी ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी थी। उन्होंने कभी पद के अहंकार को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। चाहे जिला अध्यक्ष का पद हो या सामान्य कार्यकर्ता की भूमिका, सबसे एक सा व्यवहार, सबकी सुनना और सबकी मदद के लिए तत्पर रहना उनकी फितरत में था। वक्ताओं ने कहा कि राजनीतिक और सामाजिक जीवन में उन्होंने जिस तरह सभी के साथ आत्मीय संबंध बनाए, वह वर्तमान पीढ़ी के लिए एक मिसाल है।
पक्ष-विपक्ष की दीवारें टूटीं, सबने कहा ‘अपना गया’
इस सभा की सबसे बड़ी विशेषता और चंद्रशेखर मिश्रा के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी जीत यह रही कि चंद्रशेखर मिश्रा को श्रद्धांजलि देने वालों में पक्ष और विपक्ष, दोनों विचारधाराओं के लोग कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ कांग्रेस, झामुमो, राजद समेत अन्य दलों के नेता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे। सबने यही कहा कि उनका जाना केवल एक दल की क्षति नहीं, बल्कि पूरे शहर के सामाजिक और राजनीतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके आकस्मिक निधन से पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई है।
प्रमुख उपस्थिति: शहर के गणमान्य ने दी अंतिम विदाई
सभा में शहर के तमाम बड़े चेहरों ने उपस्थिति दर्ज कराई। मंच पर और श्रोताओं में बैठे प्रमुख लोगों में शामिल थे:
- कमल किशोर
- राकेश्वर पांडेय
- रामबाबू तिवारी
- पवन अग्रवाल
- निर्मल मिश्रा
- सुनील पाठक
- नकुल तिवारी
- दशरथ चौबे
- हरेंद्र मिश्रा
- मुन्ना चौबे
- डीडी त्रिपाठी
- एम एन सिंह
- रविन्द्र मिश्रा
- एम एन पांडेय
- विमल मिश्रा
- उपेंद्र मिश्रा
- आनंद मिश्रा
- श्याम जी तिवारी
- रिंकू मिश्रा
- निशांत मिश्रा
- रितेश झा
- पप्पू उपाध्याय
इनके अलावा मिश्रा परिवार के सदस्य और समाज के हजारों गणमान्य नागरिक इस भावुक क्षण के साक्षी बने। हर किसी की जुबान पर बस उनके किस्से और उनकी सादगी की बातें थीं।
भास्कर भवन में लगेगी चंद्रशेखर मिश्रा की प्रतिमा, सामूहिक घोषणा
सभा के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण और भावुक घोषणा की गई। उपस्थित जनसमूह और वरिष्ठ जनों की सहमति से यह तय किया गया कि सिदगोड़ा स्थित भास्कर भवन परिसर में स्वर्गीय चंद्रशेखर मिश्रा की आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इस घोषणा का उपस्थित हजारों लोगों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया। आयोजकों ने कहा कि यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को उनकी सादगी, सौम्यता और सर्वस्पर्शी व्यक्तित्व की याद दिलाती रहेगी। यह फैसला दर्शाता है कि वे लोगों के दिलों में किस कदर बसते थे।
एक युग का अंत, पर यादें रहेंगी अमर
श्रद्धांजलि सभा के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। माहौल भारी था, लेकिन हर चेहरे पर एक संतोष का भाव भी था कि चंद्रशेखर मिश्रा जैसा व्यक्तित्व इस शहर को मिला। वक्ताओं ने कहा कि वे भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा बोए गए सेवा, सौहार्द और सादगी के बीज इस शहर की फिजाओं में हमेशा महकते रहेंगे। उनके बताए रास्ते पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि असली राजनीति पद या सत्ता की नहीं, बल्कि दिलों पर राज करने की होती है। चंद्रशेखर मिश्रा ने यही किया। उनके जाने से जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भर पाना मुश्किल है, लेकिन भास्कर भवन में लगने वाली उनकी प्रतिमा और लोगों के दिलों में बसी उनकी यादें उन्हें हमेशा जिंदा रखेंगी।
दैनिक भास्कर पर भी इस आयोजन की विस्तृत कवरेज देखी जा सकती है।

