

घाटशिला में जमीन का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर करने का आरोप, जिंदा वारिसों को कागजों में मृत दिखाकर बेची गई पुश्तैनी जमीन!
रजिस्टर-II में म्यूटेशन नहीं मिलने के बावजूद रजिस्ट्री पर सवाल, नीलाद्री नंदी पर परिवार ने लगाया फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से जमीन बेचने का आरोप

राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा। घाटशिला अंचल के मौजा पुरुड़ी स्थित खाता संख्या 108, प्लॉट संख्या 423 की 0.21 एकड़ जमीन का विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि जिंदा वारिसों को सरकारी कागजात में मृत दिखाकर उनकी पुश्तैनी जमीन की बिक्री की गई। परिवार ने इस पूरे मामले में नीलाद्री नंदी सहित अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है।
परिवार के अनुसार, झारखंड सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के कंप्यूटराइज्ड रजिस्टर-II (फॉर्म J1) में 10 जुलाई 2026 को स्पष्ट रूप से ‘Mutation Cases Not Found’ दर्ज है। इसके बावजूद आरोप है कि 20 जुलाई 2026 को उक्त जमीन मिथुन लोहार और राजकुमार सार के नाम बेच दी गई। इससे जमीन की रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
1972 के बंटवारा विलेख से जुड़ी है जमीन
कोलकाता निवासी आलोक कुमार कुंडू चौधरी और जयंत कुंडू चौधरी ने घाटशिला अंचलाधिकारी को लिखित आपत्ति देकर बताया है कि विवादित जमीन उनकी माता स्व. शोभा रानी कुंडू चौधरी को वर्ष 1972 के बंटवारा विलेख (डीड संख्या 3176) से प्राप्त हुई थी। परिवार का आरोप है कि नीलाद्री नंदी ने कथित फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर पहले अंकित अग्रवाल को जमीन बेची और बाद में 20 जुलाई 2026 को जमीन की आगे बिक्री कर दी।
दो वंशावलियों ने खड़े किए गंभीर सवाल
मामले में जोड़ा सा पंचायत के मुखिया द्वारा जारी वंशावली भी विवाद के घेरे में है। परिवार का आरोप है कि 16 मई 2025 की वंशावली में रीवा नंदी और शोभा नंदी को किशोरी मोहन नंदी की पुत्रियां होते हुए मृत दर्शाया गया था, जबकि 16 अगस्त 2026 को जारी वंशावली में दोनों को जीवित दिखाया गया। एक ही परिवार के सदस्यों की स्थिति में इस तरह बदलाव कैसे हुआ, इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि नीलाद्री नंदी द्वारा अन्य मौजों में भी कथित रूप से फर्जी तरीके से जमीन बेची जा रही है। यहां तक कि बंदोबस्ती की जमीन की बिक्री का भी आरोप लगाया गया है।
दाखिल-खारिज वाद रद्द करने की मांग
परिवार ने दाखिल-खारिज वाद संख्या 382/2026-27 को तत्काल रद्द करने तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में दिया गया आपत्ति पत्र 25 अगस्त 2026 को घाटशिला अनुमंडल कार्यालय में प्राप्त किया गया था। इसकी प्रतिलिपि पूर्वी सिंहभूम के डीएलआरडीसी को भी भेजी गई है।
अब सवाल यह है कि जब सरकारी रिकॉर्ड में म्यूटेशन नहीं मिलने की बात दर्ज थी, तो जमीन की बिक्री किस आधार पर हुई? दो अलग-अलग वंशावलियों में नामित व्यक्तियों की स्थिति क्यों बदली? क्या राजस्व विभाग इन आरोपों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा? फिलहाल लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

