लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर के प्रतिष्ठित तुलसी भवन में आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जयंती सह विजया मिलन समारोह का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। सिंहभूम जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत की अमिट छाप छोड़ी। संस्थान के चित्रकूट सभागार में ‘काव्य कलश’ के बैनर तले हुए इस समारोह में नगर के गणमान्य साहित्यकार, कवि और श्रोता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जयंती पर साहित्यिक समागम
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के उपाध्यक्ष रामनन्दन प्रसाद ने की, जबकि कुशल संचालन श्रीमती रीना सिन्हा सलोनी ने किया। सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ नीलाम्बर चौधरी ने किया। स्वागत भाषण संस्थान के महासचिव डॉ प्रसेनजित तिवारी ने प्रस्तुत करते हुए वाल्मीकि रामायण की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। माधवी उपाध्याय ने आदिकवि महर्षि वाल्मीकि का विस्तृत जीवन परिचय प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
मुख्य अतिथि एवं मंचासीन विशिष्टजन
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अर्का जैन विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ अंगद तिवारी उपस्थित थे। उनके साथ मंच पर संस्थान के वरीय न्यासी मुरलीधर केडिया एवं अध्यक्ष सुभाष चन्द्र मुनका विराजमान थे। डॉ अंगद तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि वाल्मीकि रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का जीवंत दस्तावेज है जो मर्यादा और सत्य की विजय का संदेश देता है।
काव्य कलश में 36 कवियों ने बांधा समां
विजया मिलन समारोह के अवसर पर आयोजित ‘काव्य कलश’ इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। इसमें नगर के 36 कवियों ने वीर रस से परिपूर्ण रचनाओं का सस्वर पाठ किया। इस दौरान विजय के गीत, माँ दुर्गा की शक्ति, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की वीरता और असत्य पर सत्य की विजय का गुणगान करने वाली कविताओं ने श्रोताओं में देशभक्ति और उत्साह का संचार किया। काव्य पाठ करने वालों में डॉ यमुना तिवारी ‘व्यथित’, नीलिमा पाण्डेय, माधवी उपाध्याय, राजेन्द्र साह राज, मनीष सिंह ‘वंदन’, हरभजन सिंह ‘रहबर’, नीलाम्बर चौधरी, बलविंदर सिंह, लक्ष्मी सिंह ‘रुबी’, रीना सिन्हा ‘सलोनी’, किरण कुमारी, अनिमा मिश्रा, वीणा कुमारी ‘नंदिनी’, मंजू कुमारी, रेखा सहाय, शक्ति श्रीवास्तव, ललिता मुनका, शशि भूषण, पूनम सिंह, रीना गुप्ता श्रुति, स्मृति पांडेय चौबे, सुस्मिता मिश्रा, जय प्रकाश पाण्डेय, प्रतिभा प्रसाद, हरि किशन चावला, डॉ. उदय प्रताप हयात, अरुणा झा, वसंत जमशेदपुरी, डॉ. मिथिलेश चौबे, सुजय कुमार, प्रणति शरण, आलोक मंजरी विदुषी, डॉ. अनिता निधि, वंदना केसर भारती प्रमुख रहे।
वीर रस और भक्ति की त्रिवेणी
काव्य गोष्ठी में प्रस्तुत रचनाओं ने वातावरण को भक्तिमय और ओजस्वी बना दिया। कवियों ने नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन करते हुए नारी शक्ति को नमन किया। साथ ही मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के चरित्र को केंद्र में रखकर आदर्श समाज की संरचना का आह्वान किया गया। डॉ यमुना तिवारी व्यथित द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस आयोजन ने जमशेदपुर की साहित्यिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान की है। आदिकवि के प्रति श्रद्धा निवेदित करते हुए यह आयोजन साहित्यिक इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।
वाल्मीकि रामायण की सार्वभौमिक प्रासंगिकता पर अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया पर वाल्मीकि का जीवन परिचय पढ़ सकते हैं।

