लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
झारखंड में उच्च शिक्षा के AI रोडमैप निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में राज्यस्तरीय परामर्शात्मक कार्यशाला का आयोजन किया गया। 24 अक्टूबर को स्वर्णरेखा ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यशाला का संचालन झारखंड राज्य संकाय विकास अकादमी (JSFDA) और राज्य सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
झारखंड में उच्च शिक्षा के AI रोडमैप पर गहन मंथन
कार्यशाला का केंद्रीय विषय India AI Future Skills and Industry Collaboration & Employability रखा गया था। इसमें राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभावी उपयोग तथा एक व्यापक रोडमैप तैयार करने पर विस्तृत चर्चा की। सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला की कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने इस उच्चस्तरीय विमर्श में सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई।
चर्चा के दौरान विद्यार्थियों के तकनीकी कौशल विकास, पाठ्यक्रमों को उद्योगों की वर्तमान जरूरतों के अनुरूप ढालने, इंटर्नशिप के अवसर बढ़ाने और व्यावहारिक प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाने पर विशेष बल दिया गया। डॉ. नीत नयना ने AI के शैक्षणिक उपयोग, कौशल विकास की नई रणनीतियों और उद्योगों के साथ सहयोग को मजबूत करने से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।
प्रस्तावित रोडमैप के प्रमुख स्तंभ
प्रस्तावित रोडमैप के तहत चार प्रमुख क्षेत्रों में AI के उपयोग को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर मंथन किया गया। इसमें शिक्षण, अनुसंधान, प्रशासन और रोजगारपरक प्रशिक्षण शामिल हैं। विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि AI आधारित टूल्स शिक्षण पद्धति को अधिक इंटरैक्टिव और व्यक्तिगत बनाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
इसके अलावा कार्यशाला में डेटा गोपनीयता, शैक्षणिक ईमानदारी और AI के नैतिक उपयोग को अत्यंत महत्वपूर्ण विषय के रूप में रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि तकनीकी प्रगति के साथ नैतिक मानकों का पालन अनिवार्य है ताकि छात्रों का डेटा सुरक्षित रहे और शोध कार्यो में मौलिकता बनी रहे।
कुलपति और कुलाधिपति का दृष्टिकोण
सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने कहा कि AI शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ विद्यार्थियों की रचनात्मकता, समस्या-समाधान क्षमता और व्यावहारिक दक्षता विकसित करने में सहायक हो सकता है। उन्होंने इसे भविष्य की शिक्षा का अनिवार्य अंग बताया।
वहीं, विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने तकनीक, कौशल विकास और उद्योग सहयोग के समन्वय को भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बताते हुए गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारपरक शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, तकनीकी नवाचार, अनुसंधान और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
इस कार्यशाला के निष्कर्ष झारखंड की उच्च शिक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने में मील का पत्थर साबित होंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशानिर्देशों के अनुरूप इस रोडमैप को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है।

