दोस्ती का खूनी खेल या मौत का इंजेक्शन? मलाड में अमन की तड़पती मौत ने खोली मुंबई की नशे वाली सड़कों की पोल
राष्ट्र संवाद संवाददाता
इंद्र यादव/मुंबई,मायानगरी… चमक-दमक, फिल्मी स्वैग, और रातों की पार्टियाँ। लेकिन इसी शहर के मलाड (कुरार गांव) की एक सुनसान गली में एक 20 साल का लड़का तड़प-तड़प कर मर गया। नाम था अमन सोनी। घर से हँसते-खेलते निकला, और लौटा सिर्फ एक लाश बनकर।
कहानी सुनो, दिल दहला देने वाली है। अमन घर पर बैठा था। उसके “जिगरी दोस्त” आए। बोले—चल यार, थोड़ी हवा खाते हैं। बहला-फुसलाकर ले गए अप्पापाड़ा के बीएमसी गार्डन में। वहाँ सुनसान। कोई नहीं। और फिर शुरू हुआ वह खूनी खेल। परिवार का आरोप साफ है—उन्हीं दोस्तों ने अमन को नशे के कई इंजेक्शन ठूंस दिए। डबल डोज, कुछ लोग कह रहे हैं। नसों में जहर दौड़ा। आँखें फटी की फटी रह गईं। साँसें उखड़ने लगीं। शरीर तड़पने लगा। लेकिन उन “दोस्तों” का दिल नहीं पसीजा। अस्पताल ले जाने की बजाय तड़पता हुआ छोड़कर भाग खड़े हुए। कैसी यह यारी? कैसी यह दोस्ती!
आज की युवा पीढ़ी को एक बार आईना दिखा दो। सोशल मीडिया पर स्वैग दिखाना, स्टोरी लगाना, “लाइफ इज शॉर्ट” वाले कोट्स लिखना—यह सब कहाँ ले जा रहा है? इंजेक्शन और सिरिंज के सहारे सीधा मौत के मुँह में। जिनके साथ उठना-बैठना था, वही खंजर बनकर पीठ में उतर गए। अब भरोसा किस पर करें? माँ-बाप पर? या इन नशे के दलालों पर जो गलियों में घूम रहे हैं?
अमन की माँ का चिराग बुझ गया। परिवार रो-रोकर पागल हो रहा है। और वो चारों “दोस्त”? कुरार पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है। बीएमसी गार्डन से फॉरेन्सिक टीम को खाली इंजेक्शन की बोतलें और नशे वाली सामग्री मिली है। पुलिस खंगाल रही है—यह सिर्फ लापरवाही थी या सोची-समझी साजिश? हत्या का केस बन सकता है। लेकिन सवाल सिर्फ कानूनी नहीं है। सवाल समाज का है।
यह सिर्फ अमन सोनी की मौत नहीं है। यह मुंबई के खोखले होते समाज का एक और सबूत है। महानगर की गलियों में ड्रग्स का कारोबार बेलगाम चल रहा है। गार्डन, पार्क, शौचालय—कहीं भी इंजेक्शन लग रहा है। युवा “कूल” बनने के चक्कर में मौत खरीद रहे हैं। घर-घर में माता-पिता बेखबर। पुलिस जब तक इन पैडलर्स की रीढ़ नहीं तोड़ेगी, तब तक ऐसे कई अमन तड़प-तड़प कर मरते रहेंगे।
दोस्ती के नाम पर माफी? बिल्कुल नहीं। ये दरिंदे नहीं हैं जो किसी को बचा सकते थे। ये वो हैं जिन्होंने मौत का इंजेक्शन ठूंसकर भाग लिया। समाज को सख्त सजा की जरूरत है। सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, कड़ी सजा। ताकि अगली बार कोई “दोस्त” किसी को गार्डन में न ले जाए।
अमन चला गया। लेकिन उसकी तड़पती आँखें हम सबको घूर रही हैं। क्या हम अभी भी सोए रहेंगे! या जागकर इस नशे के जहर को घर-घर से निकालेंगे! फैसला तुम्हारा है, मुंबई।

