चतरा की माटी से जुड़े, जनता के बीच रहने वाले कालीचरण सिंह
राष्ट्र संवाद संवाददाता
झारखंड की मिट्टी,जंगल-पहाड़ और गांव-देहात के सीधे-सादे लोगों के बीच पले-बढ़े कालीचरण सिंह आज चतरा की जनता के लिए सिर्फ सांसद नहीं, बल्कि अपने घर-परिवार के एक सदस्य जैसे हैं। संसद में हों या गांव की कच्ची पगडंडियों पर, उनका अंदाज हमेशा एक जैसा ही रहता है सादा, सहज और अपनापन से भरा।
इस तस्वीर में भी उनकी यही सादगी साफ दिखाई देती है। जमीन पर आम लोगों के साथ बैठना, बिना किसी दिखावे के सबकी बातें सुनना और गांव की परंपराओं व रीति-रिवाजों में पूरे मन से शामिल होना उनके सहज स्वभाव को दर्शाता है। माथे पर तिलक और पारंपरिक पहनावा यह संदेश देते हैं कि बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी वे अपनी मिट्टी, संस्कार और संस्कृति को नहीं भूले हैं।
जनता के बीच, जनता की तरह
कालीचरण सिंह का मानना है कि किसी सांसद की असली पहचान बड़े मंचों, गाड़ियों के काफिलों और पद-प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि जनता के सुख-दुख में साथ खड़े रहने से होती है। यही वजह है कि गांवों में पहुंचने पर वे लोगों के बीच बैठते हैं, उनकी समस्याओं को सुनते हैं और उनके समाधान के लिए प्रयास करते हैं।
कहीं बिजली की समस्या हो, कहीं सड़क और पेयजल की परेशानी हो या गांव के बच्चों और युवाओं को खेलकूद के लिए सहयोग की जरूरत हो, वे अपनी क्षमता के अनुसार हर जगह लोगों के साथ खड़े रहने का प्रयास करते हैं। उनके लिए जनता से संवाद केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि होने की जिम्मेदारी का अहम हिस्सा है।
उनका स्पष्ट मानना है कि जनता ही सर्वोपरि है और जनप्रतिनिधि जनता का सेवक होता है। इसी सोच के साथ वे लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनने और उनकी समस्याओं को समझने के लिए अपने लोगों के बीच नजर आते हैं।
*माटी से जुड़ाव ही सबसे बड़ी ताकत*
कालीचरण सिंह की सबसे बड़ी खासियत यही है कि सांसद बनने के बाद भी उनके व्यवहार में कोई बनावटीपन नहीं आया है। गांव के बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना हो, युवाओं के साथ बैठकर उनकी बातों को सुनना हो या आम लोगों के साथ जमीन पर बैठकर बातचीत करनी हो, वे हर जगह सहज और आत्मीय नजर आते हैं।
उनकी कोशिश है कि चतरा का विकास गांव के आखिरी घर तक पहुंचे, युवाओं को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें और हर जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी बात रखने का उचित मंच मिले। ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को समझना और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप विकास कार्यों को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
चतरा जैसे ग्रामीण बहुल क्षेत्र में जनप्रतिनिधि की भूमिका केवल संसद में क्षेत्र की आवाज उठाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि गांवों की जमीनी हकीकत को समझना, लोगों की जरूरतों को पहचानना और उनके साथ सीधा संवाद बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जनता के बीच उनकी सहज उपस्थिति इसी जुड़ाव को रेखांकित करती है।
यही सादगी, यही अपनापन और अपनी माटी के प्रति यही लगाव कालीचरण सिंह को चतरा की जनता के बीच एक अलग पहचान दिलाता है। अपनी जड़ों, संस्कारों और संस्कृति से जुड़े रहकर जनता के बीच रहना ही उनकी कार्यशैली की विशेषता है। यही कारण है कि चतरा के लोग उन्हें केवल एक जनप्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि अपने बीच का एक ऐसा व्यक्ति मानते हैं, जिससे वे सहजता से अपनी बात कह सकते हैं।

