UCIL टेलिंग्स पॉन्ड के पास भूजल में 13 गुना अधिक सल्फेट, वैज्ञानिक अध्ययन से उठे सवाल
2025 में प्रकाशित रिपोर्ट में निगरानी कुओं और सामान्य भूजल के आंकड़ों में बड़ा अंतर; ग्रामीणों ने स्वतंत्र जांच और निगरानी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा। यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) के जादूगोड़ा यूरेनियम मिल स्थित टेलिंग्स निस्तारण सुविधा के आसपास भूजल की गुणवत्ता को लेकर वर्ष 2025 में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन ने चिंता बढ़ा दी है। जर्नल ऑफ रेडियोएनालिटिकल एंड न्यूक्लियर केमिस्ट्री में प्रकाशित इस अध्ययन में निगरानी कुओं और सामान्य भूजल के रासायनिक आंकड़ों में उल्लेखनीय अंतर दर्ज किया गया है।
अध्ययन के अनुसार, निगरानी कुओं में सल्फेट की औसत मात्रा 726 मिलीग्राम प्रति लीटर, जबकि सामान्य भूजल में 54 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई, जो लगभग 13.4 गुना अंतर है। इसी तरह कुल कठोरता 1,036 के मुकाबले 287 मिलीग्राम प्रति लीटर तथा क्लोराइड 313 के मुकाबले 42 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया। विद्युत चालकता भी निगरानी कुओं में सामान्य भूजल की तुलना में काफी अधिक पाई गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चिंता केवल यूरेनियम तक सीमित नहीं है, बल्कि भूजल के समग्र रासायनिक स्वरूप की भी जांच जरूरी है। हालांकि, अध्ययन ने टेलिंग्स पॉन्ड और भूजल में मौजूद यूरेनियम के बीच स्पष्ट संबंध स्थापित नहीं किया है। भूजल में बदलाव के पीछे क्षेत्रीय भू-वैज्ञानिक विशेषताओं की भूमिका की संभावना भी जताई गई है। इसलिए टेलिंग्स पॉन्ड को प्रदूषण का निश्चित स्रोत मानने से पहले स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच आवश्यक है।
अध्ययन में वर्षा जल के रिसाव संबंधी प्रयोग के दौरान लगभग 3.5 प्रतिशत यूरेनियम निकलने का उल्लेख करते हुए टेलिंग्स पॉन्ड में जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
मेचुआ, इचड़ा और चाटीकोचा सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा स्वतंत्र वैज्ञानिक संस्थाओं की निगरानी में जांच कराने की मांग की है। उनकी मांग है कि टेलिंग्स पॉन्ड, निगरानी कुओं, आसपास के नलकूपों, बोरवेल और पेयजल स्रोतों से एक साथ नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच कराई जाए। सामाजिक कार्यकर्ता सुनील मुर्मू ने भी संभावित दुष्प्रभावों की जांच के लिए पत्र दिया है।
ग्रामीणों ने UCIL से टेलिंग्स पॉन्ड की रोकथाम व्यवस्था, रिसाव नियंत्रण और भूजल निगरानी के वर्षों के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है। विशेषज्ञों के अनुसार, निष्पक्ष निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए यूरेनियम के साथ सल्फेट, क्लोराइड, कठोरता, फ्लोराइड, नाइट्रेट, आयरन, मैंगनीज, लेड और अन्य संबंधित रासायनिक तत्वों की भी जांच जरूरी है। अब सवाल यह है कि इन रासायनिक संकेतों के वास्तविक स्रोत का पता लगाने के लिए स्वतंत्र जांच कब शुरू होगी।

