xनई दिल्ली. एनसीईआरटी की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में भारतीय इतिहास के मध्यकालीन दौर और मुगल शासन के खिलाफ विभिन्न समुदायों के प्रतिरोध को प्रमुखता दी गई है. अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी : इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2 नामक पुस्तक मंगलवार को जारी की गई. इसमें 1000 से 1700 ईस्वी के बीच के भारत को रेजिस्टेंस एंड रेजिलिएंस अध्याय के तहत शामिल किया गया है.
पुस्तक में दिल्ली सल्तनत और मुगल विस्तार के खिलाफ राजपूतों, अहोम, मराठों, सिखों और जाटों के संघर्ष का विवरण दिया गया है. इसमें गुरु अर्जन देव और गुरु तेग बहादुर की शहादत तथा गुरु हरगोबिंद की नजरबंदी का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सिख गुरुओं के खिलाफ मुगल शासन की क्रूरता की इतिहास में कम ही मिसालें मिलती हैं. पुस्तक में गुरु गोबिंद सिंह द्वारा 1699 में खालसा पंथ की स्थापना और इसके बाद सिख मिसलों के उदय का भी उल्लेख है.
जाट विद्रोह और मराठा स्वराज्य का उल्लेख
पुस्तक में गंगा-यमुना दोआब के जाटों के मुगल शासन के खिलाफ प्रतिरोध को भी स्थान दिया गया है. इसमें भारी कर और शोषण के साथ औरंगजेब की धार्मिक नीतियों को प्रतिरोध के कारणों में गिनाते हुए 1669 में गोकुल जाट के नेतृत्व में हुए विद्रोह का उल्लेख किया गया है.
मुगल काल में मेवाड़ के प्रतिरोध, महाराणा प्रताप, अहोमों की लड़ाई और 1671 के सरायघाट युद्ध का भी विवरण है. मराठों के संदर्भ में छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज्यÓके विचार, किलों और गुरिल्ला युद्धनीति को प्रमुखता दी गई है.
मंदिरों को सामाजिक-आर्थिक संस्थाओं के रूप में बताया
पाठ्यपुस्तक में मंदिरों को केवल धार्मिक स्थल न बताते हुए उनके आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान पर भी चर्चा की गई है. इसमें मंदिरों के भूमि स्वामित्व, रोजगार, दान और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में भूमिका का उल्लेख है. साथ ही 11वीं सदी के बाद कई मंदिरों की लूट और विध्वंस तथा बाद के दौर में मंदिरों के पुनर्निर्माण का भी विवरण दिया गया है.

