बाढ़ में पशुपालकों के सामने चारा और आशियाने का संकट गहराता जा रहा है। बेगूसराय जिले के तेघड़ा दियारा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालकों की कमर तोड़ दी है। लगातार बढ़ते जलस्तर ने न केवल खेतों में खड़ी फसलों को निगल लिया है, बल्कि मवेशियों के लिए जमा किया गया साल भर का चारा और उनके आशियाने भी तबाह कर दिए हैं। इस आपदा ने 2021 के पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं, जिससे हजारों परिवारों के सामने भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
बाढ़ में पशुपालकों के सामने चारा और आशियाने का संकट: तेघड़ा दियारा का हाल
तेघड़ा दियारा क्षेत्र में बाढ़ से पशुपालकों के सामने चारा, भूसा और मवेशियों के आशियाने का संकट खड़ा हो गया है। खेतों में लगा पशुचारा पानी में गलकर नष्ट हो गया, जबकि जमा किया गया भूसा भी बर्बाद हो गया। कच्चे व खपरैल मवेशी घरों को भी नुकसान पहुंचा है। इस बार बाढ़ ने 2021 के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। हजारों घर प्रभावित हुए और गुप्ता बांध पर कई जगह रिसाव की स्थिति बनी।
भगवानपुर चक्की वार्ड 13-14, बिनलपुर-अजगरबर, मधुरापुर कुँवारी टोला, बीचला टोला व बरौनी-2 मधुरापुर में पशुचारे का व्यापक नुकसान हुआ है। निपनियां मधुरापुर वार्ड 12 में अजीत सिंह, गोपाल सिंह, रामगति सिंह व सोनू सिंह का भूसा और मवेशी घर क्षतिग्रस्त हुआ।
बरौनी-2 मधुरापुर वार्ड 11 में रोशनी कुमार का खपरैल घर पेड़ गिरने से क्षतिग्रस्त हो गया। अंचलाधिकारी दीपक कुमार के निर्देश पर फ्लड कटिंग के मजदूरों ने घर पर गिरे पेड़ को हटाया। परिवार मजदूरी कर गुजर-बसर करता है और फिलहाल दूसरे घर में रहने को मजबूर है। पीड़ित ने सीओ व एसडीओ से घर की मरम्मत के लिए सहायता मांगी है।

प्रशासनिक स्तर पर राहत व बचाव कार्य तेज
जिला प्रशासन और अंचलाधिकारी दीपक कुमार की टीम लगातार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर क्षति का आकलन कर रही है। गुप्ता बांध पर बने रिसाव बिंदुओं को बंद करने के लिए फ्लड फाइटिंग टीमें दिन-रात लगी हुई हैं। एसडीओ ने बताया कि पशुचारे की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए जिला मुख्यालय से संपर्क किया गया है। पशुपालन विभाग द्वारा प्रभावित पंचायतों में साइलेज और पशु आहार के पैकेट पहुंचाने की योजना तैयार की जा रही है। इसके अलावा, नावों की संख्या बढ़ाकर मरून टोलों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
पशुपालकों की आर्थिक कमर टूटी, भविष्य अनिश्चित
पशुपालक अजीत सिंह बताते हैं, “साल भर की मेहनत से जमा किया गया भूसा और पशुचारा पल भर में पानी में बह गया। मवेशी दूध देना कम कर चुके हैं, क्योंकि उन्हें खिलाने के लिए कुछ नहीं बचा।” गोपाल सिंह और रामगति सिंह का कहना है कि कच्चे मवेशी घर गिरने से मवेशी खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं, जिससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। सोनू सिंह ने बताया कि सरकारी सहायता मिलने में देरी हुई तो मवेशियों को बेचने की नौबत आ जाएगी। स्थानीय मुखिया प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत त्वरित मुआवजे की मांग की है।
गुप्ता बांध की स्थिति बनी चिंता का विषय
गुप्ता बांध तेघड़ा दियारा की लाइफलाइन माना जाता है। इस बांध पर कई जगहों पर रिसाव (सीपेज) होने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। जल संसाधन विभाग के अभियंताओं की टीम सैंड बैग और जियो बैग डालकर रिसाव रोकने का प्रयास कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बांध टूटा तो भगवानपुर चक्की, बिनलपुर, मधुरापुर समेत दर्जनों गांवों में तबाही मच जाएगी। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशानिर्देशों के अनुसार बांध सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
भविष्य की चुनौतियां और पशुपालकों की मांग
बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी पशुपालकों की मुश्किलें कम नहीं होंगी। खेतों में गाद जमा होने से अगली फसल (रबी) की बुआई प्रभावित होगी। पशुचारे की कमी लंबे समय तक बनी रहेगी। प्रभावित पशुपालकों ने मांग की है कि सरकार पशु शेड निर्माण के लिए अनुदान दे, भूसा बैंक की स्थापना करे और फसल क्षति के साथ-साथ पशुचारा क्षति का भी मुआवजा दे। रोशनी कुमार जैसे गरीब परिवारों के लिए आवास योजना (इंदिरा आवास/पीएम आवास) के तहत पक्का मकान स्वीकृत करने की मांग भी उठ रही है। इस संकट की घड़ी में सामाजिक संगठन भी आगे आकर सूखा चारा व दवा वितरित कर रहे हैं।

