बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित सिमरिया, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मभूमि है और लंबे समय से यहां उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित करने की मांग उठती रही है। इसी क्रम में दिनकर की मूर्ति स्थापना की मांग को लेकर गुरुवार को सिमरिया के बुद्धिजीवियों का एक प्रतिनिधिमंडल स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपा। यह मुलाकात सिमरिया सिक्स लेन गोलंबर पर दिनकर की प्रतिमा लगवाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
दिनकर की मूर्ति स्थापना को लेकर जनप्रतिनिधियों का आश्वासन
बीहट । सिमरिया सिक्स लेन गोलंबर पर दिनकर की प्रतिमा स्थापित करने की मांग को लेकर गुरुवार को सिमरिया के बुद्धिजीवियों ने विधान पार्षद सर्वेश कुमार, बछवाड़ा विधायक सुरेंद्र मेहता एवं मटिहानी के पूर्व विधायक राजकुमार सिंह से भेंट की। राष्ट्रकवि दिनकर मूर्ति स्थापना संघर्ष समिति के सहसंयोजक कृष्ण मुरारी ने बताया कि छह सदस्य प्रतिनिधिमंडल जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर सिमरिया सिक्स लेन गोलंबर पर दिनकर की मूर्ति स्थापित करने की मांग की।
विधान पार्षद सर्वेश कुमार ने कहा कि दिनकर की जन्मभूमि को साहित्यिक तीर्थ भूमि बनाने के लिए सरकार कृत संकल्पित है। अनेक विकास योजनाओं को धरातल पर उतारा जाएगा। वही मटिहानी के पूर्व विधायक राजकुमार सिंह ने कहा कि हम आपकी मांग का समर्थन करते हैं। सरकार तक इन बातों को पहुंचाने का प्रयास करूंगा। पूर्व मंत्री सुरेंद्र मेहता ने कहा कि दिनकर की जन्मभूमि पर दिनकर की मूर्ति ही स्थापित होगी। सरकार इसे अपने एजेंडे में ले चुकी है। हम सब इस ओर प्रयासरत हैं।

प्रतिनिधिमंडल में विश्वम्भर सिंह, कैलाश सिंह, गुलशन कुमार, पंकज कुमार एवं मीडिया प्रभारी संजीव फिरोज शामिल थे। मीडिया प्रभारी ने कहा कि जब तक दिनकर की मूर्ति नहीं लगेगी तब तक संघर्ष जारी रहेगा। हम प्रशासन एवं सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
सिमरिया का साहित्यिक महत्व और भविष्य की योजनाएं
सिमरिया न केवल दिनकर की जन्मस्थली है, बल्कि यह हिंदी साहित्य का एक प्रमुख तीर्थस्थल भी है। यहां हर वर्ष दिनकर जयंती पर भव्य आयोजन होते हैं, जिसमें देश भर के साहित्यकार जुटते हैं। सिक्स लेन गोलंबर पर प्रतिमा स्थापित होने से इस स्थान की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और सुदृढ़ होगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और नई पीढ़ी को दिनकर के व्यक्तित्व और कृतित्व से परिचित होने का अवसर मिलेगा। रामधारी सिंह दिनकर की रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं और युवाओं को प्रेरित करती हैं।
सरकार की ओर से मिले आश्वासन के बाद संघर्ष समिति के सदस्यों में उत्साह है, लेकिन वे तब तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं जब तक मूर्ति स्थापना का कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो जाता। आने वाले दिनों में इस मांग को लेकर और भी व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाए जाने की योजना है।

