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    Home » मतदाता सूची में विदेशी नागरिकों के नाम, लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल
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    मतदाता सूची में विदेशी नागरिकों के नाम, लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 11, 2026No Comments4 Mins Read
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    मतदाता सूची
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    लेखक: देवानंद सिंह

    मतदाता सूची: लोकतंत्र की नींव

    भारत का लोकतंत्र दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक प्रयोग के रूप में जाना जाता है। इस लोकतंत्र की ताकत केवल चुनाव कराने में नहीं, बल्कि इस बात में है कि चुनाव में मतदान करने वाला प्रत्येक व्यक्ति वास्तव में देश का पात्र नागरिक हो। मतदाता सूची इसी लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहली और सबसे महत्वपूर्ण सीढ़ी है। इसलिए यदि किसी विदेशी नागरिक का नाम भारतीय मतदाता सूची में दर्ज हो जाता है, तो इसे महज एक छोटी प्रशासनिक भूल कहकर आगे बढ़ जाना उचित नहीं होगा।

    झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में तीन अफगान नागरिकों के नाम सामने आना निश्चित रूप से गंभीर विषय है। जांच के बाद उनकी पहचान विदेशी नागरिकों के रूप में हुई और उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रशासन ने पुलिस और संबंधित अधिकारियों को जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। यह कार्रवाई जरूरी है, लेकिन इससे भी अधिक जरूरी है उस पूरी प्रक्रिया की तह तक जाना, जिसके कारण ये नाम मतदाता सूची में पहुंचे।

    आखिर सवाल यह है कि विदेशी नागरिक भारतीय मतदाता सूची का हिस्सा कैसे बने?

    मतदाता बनने के लिए निर्धारित दस्तावेज, आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया होती है। बूथ स्तर से लेकर निर्वाचन कार्यालय तक कई स्तरों पर जांच की व्यवस्था है। इसके बावजूद यदि किसी विदेशी नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो गया, तो कहीं न कहीं व्यवस्था में चूक हुई है। यह चूक जानबूझकर हुई या अनजाने में, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    इस घटना को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हथियार बनाने के बजाय इसे व्यवस्था को मजबूत करने के अवसर के रूप में देखना चाहिए। चुनाव किसी दल की संपत्ति नहीं हैं। मतदाता सूची भी किसी राजनीतिक विचारधारा की नहीं, बल्कि लोकतंत्र की साझा संपत्ति है। इसलिए इसमें गड़बड़ी का मामला सामने आने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को राजनीतिक लाभ-हानि से ऊपर उठकर व्यवस्था की शुचिता की चिंता करनी चाहिए।

    यह भी समझना होगा कि विदेशी नागरिक का नाम मतदाता सूची में मिल जाना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसने मतदान किया है या चुनाव को प्रभावित किया है। इसलिए जांच तथ्यों, दस्तावेजों और कानून के आधार पर होनी चाहिए। अफवाह, सोशल मीडिया की सनसनी और बिना प्रमाण के आरोप लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत नहीं करते, बल्कि समाज में अनावश्यक भ्रम पैदा करते हैं।

    लेकिन दूसरी तरफ इस मामले को हल्का लेना भी उतना ही खतरनाक है। आज तीन नाम मिले हैं, कल संख्या अधिक हो सकती है। इसलिए प्रशासन को यह भी देखना चाहिए कि क्या ऐसी गड़बड़ी केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित है या कहीं और भी ऐसी स्थिति मौजूद है। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य ही मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाना है। ऐसे में जहां भी वास्तविक संदेह हो, वहां कानून के दायरे में दस्तावेजों का सत्यापन किया जाना चाहिए।

    साथ ही यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि यदि किसी व्यक्ति ने गलत जानकारी देकर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराया, तो उसके पीछे किसकी मदद थी? क्या फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ? क्या किसी स्तर पर सत्यापन में लापरवाही बरती गई? क्या किसी ने जानबूझकर नियमों को दरकिनार किया? इन सवालों के जवाब मिलना जरूरी है।

    केवल नाम हटाना समाधान नहीं है, गलती की जड़ तक पहुंचना समाधान है।

    भारत में प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना चाहिए और जो व्यक्ति पात्र नहीं है, उसका नाम किसी भी परिस्थिति में नहीं होना चाहिए। एक तरफ पात्र नागरिक का नाम छूटना उसके लोकतांत्रिक अधिकार का हनन है, तो दूसरी तरफ अपात्र व्यक्ति का नाम शामिल होना चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। दोनों ही स्थितियां गंभीर हैं।

    इसलिए निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन को इस मामले में पारदर्शिता बरतनी चाहिए। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होना चाहिए कि विदेशी नागरिकों के नाम किस प्रक्रिया से मतदाता सूची में आए और इसके लिए कौन जिम्मेदार था। यदि लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारी तय हो, और यदि किसी साजिश या फर्जीवाड़े के प्रमाण मिलते हैं तो कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई हो। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर दिशानिर्देश उपलब्ध हैं।

    लोकतंत्र केवल ईवीएम, मतदान केंद्र और चुनाव परिणाम का नाम नहीं है। लोकतंत्र का असली आधार विश्वसनीय मतदाता और शुद्ध मतदाता सूची है। मतदाता सूची में एक गलत नाम भी व्यवस्था के लिए चेतावनी है।

    जमशेदपुर में सामने आया यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने एक बड़ी खिड़की खोल दी है। अब जरूरत है कि प्रशासन उस खिड़की से भीतर झांके और यह सुनिश्चित करे कि लोकतंत्र के दरवाजे पर दस्तक देने वाला हर मतदाता वास्तव में उसका पात्र नागरिक हो।

    लोकतंत्र में हर वोट की कीमत है, इसलिए हर वोटर की पहचान भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

    मतदाता सूची विदेशी नागरिक
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