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    पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था समेत लंबित मांगों को लेकर देशव्यापी हड़ताल, जमशेदपुर में भी बैंकिंग सेवाएं प्रभावित

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 11, 2026No Comments5 Mins Read
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    देशव्यापी हड़ताल
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने समेत लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को बुलाई गई देशव्यापी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के बैनर तले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया है। इस हड़ताल से न केवल नकद जमा-निकासी बल्कि चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट निर्माण और केवाईसी जैसे आवश्यक कार्य भी बुरी तरह बाधित हुए हैं। जमशेदपुर जैसे प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक नगरी में कारोबारियों, उद्यमियों और आम ग्राहकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यूनियनों का आरोप है कि मार्च 2024 के द्विपक्षीय समझौते में बनी सहमति के बावजूद वित्त मंत्रालय स्तर पर फाइल लंबित पड़ी है, जिसके कारण कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है।

    पृष्ठभूमि: पांच दिवसीय बैंकिंग की मांग क्यों?

    भारतीय बैंकिंग क्षेत्र लंबे समय से सप्ताह में पांच कार्यदिवस की मांग कर रहा है। वर्तमान में बैंकों में दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है, लेकिन यूनियनों का तर्क है कि कार्यभार और तनाव के बढ़ते स्तर को देखते हुए पूर्ण रूप से पांच दिवसीय कार्य सप्ताह आवश्यक है। मार्च 2024 में हुए द्विपक्षीय समझौते के दौरान इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनियनों के बीच इस मुद्दे पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी। हालांकि, अंतिम मंजूरी के लिए मामला वित्त मंत्रालय के पास भेजा गया, जहां यह ढाई वर्षों से लंबित है। यूनियन नेताओं का कहना है कि खुद वित्त मंत्री की मौखिक सहमति के बावजूद विभागीय स्तर पर फाइल आगे नहीं बढ़ना निराशाजनक है।

    देशव्यापी हड़ताल का असर और प्रमुख मांगें

    पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने समेत लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को देशभर के बैंककर्मी हड़ताल पर हैं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान का असर जमशेदपुर में भी देखने को मिल रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शाखा स्तर पर कामकाज प्रभावित है। गौरतलब है कि देशव्यापी स्तर पर UFBU से जुड़े संगठन करीब 90 प्रतिशत बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

    हड़ताल का सबसे बड़ा मुद्दा सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग है। बैंक यूनियनों का कहना है कि मार्च 2024 के द्विपक्षीय समझौते के दौरान इस दिशा में सहमति बनने के बावजूद व्यवस्था अब तक लागू नहीं हुई है। इसके अलावा संशोधित परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) व्यवस्था को लेकर भी यूनियन का विरोध है। पेंशन और बैंक कर्मचारियों से जुड़े अन्य लंबित मुद्दे भी आंदोलन का हिस्सा हैं।

    UFBU के वरिष्ठ सदस्य मणिकांत शर्मा ने बताया कि उनकी यह मांग ढाई वर्षों से लंबित है, जबकि इस विषय पर देश के वित्त मंत्री की भी सहमति प्राप्त हो चुकी है। इसके बावजूद उन्हीं के विभाग में यह मामला लंबित पड़ा हुआ है।

    यूनियन सदस्य पंकज कुमार सिंह ने बताया कि जमशेदपुर में शुक्रवार की हड़ताल से कितने करोड़ रुपये का बैंकिंग कारोबार प्रभावित हुआ है, इसका कोई सत्यापित आधिकारिक आंकड़ा अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। हड़ताल समाप्त होने के बाद बैंक यूनियन या स्थानीय बैंक समन्वय संगठन की ओर से क्लीयरिंग और शाखागत लेनदेन के आधार पर आंकड़ा सामने आ सकता है।

    हालांकि, जमशेदपुर जैसे बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक शहर में हड़ताल का असर नकद जमा-निकासी, चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट, केवाईसी संबंधी कार्य और दूसरे शाखा आधारित लेनदेन पर पड़ रहा है।

    पंकज कुमार सिंह ने बताया कि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) पर दबाव बढ़ाने के लिए चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की गई है। शुक्रवार की एक दिवसीय हड़ताल के बाद 28, 29 और 30 सितंबर को लगातार तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल प्रस्तावित है। इसके बाद भी समाधान नहीं निकला तो अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।

    आगामी आंदोलन की रूपरेखा और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

    यूनियनों द्वारा घोषित चरणबद्ध आंदोलन की अगली कड़ी में सितंबर माह के अंतिम तीन दिनों (28, 29, 30 सितंबर) की लगातार तीन दिवसीय हड़ताल बैंकिंग क्षेत्र के लिए अभूतपूर्व स्थिति पैदा कर सकती है। लगातार तीन दिन बैंक बंद रहने से एटीएम में नकदी की किल्लत, चेक क्लियरेंस का बैकलॉग और अंतर-बैंक लेनदेन में भारी व्यवधान आना तय माना जा रहा है। जमशेदपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भी इस हड़ताल पर चिंता जताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यदि अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की नौबत आती है, तो इसका असर न केवल बैंकिंग बल्कि समूची अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, क्योंकि ऋण वितरण, निर्यात-आयात भुगतान और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी तरह रुक जाएगा।

    इस देशव्यापी हड़ताल ने एक बार फिर बैंकिंग क्षेत्र में लंबित सुधारों की ओर ध्यान खींचा है। पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग नई नहीं है, लेकिन द्विपक्षीय समझौते के बाद भी क्रियान्वयन में देरी से कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। भारतीय बैंक संघ (IBA) और वित्त मंत्रालय पर दबाव बनाने के लिए यूनियनों ने चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति अपनाई है। आम जनता और कारोबारियों को डिजिटल बैंकिंग विकल्पों का सहारा लेना पड़ रहा है, लेकिन शाखा आधारित कार्यों के लिए कोई विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।

    जमशेदपुर समाचार पांच दिवसीय बैंकिंग बैंक हड़ताल बैंकिंग क्षेत्र यूएफबीयू
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