लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में पुश्तैनी जमीन के बंटवारे को लेकर फायरिंग की एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिससे इलाके में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। यह घटना थाना क्षेत्र के बरियारपुर गांव में बुधवार की देर रात घटित हुई, जहां पैतृक संपत्ति के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और कई राउंड गोलियां चलीं।
बरियारपुर गांव में देर रात ताबड़तोड़ फायरिंग से मचा हड़कंप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बरियारपुर गांव निवासी व्यवसायी कंचन सिंह (पुत्र देवेंद्र सिंह) और व्यवसायी रामानुज सिंह (पुत्र बालेश्वर सिंह) आपस में चाचा-भतीजा हैं। दोनों परिवार लंबे समय से पटना में रहकर अपना निजी व्यवसाय संचालित करते हैं। पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। बुधवार की रात इसी विवाद ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते दोनों पक्षों की ओर से कई राउंड फायरिंग होने लगी। गोलियों की आवाज सुनकर गांव में अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीण दहशत में अपने घरों में दुबक गए।
पुश्तैनी जमीन के बंटवारे को लेकर फायरिंग की सूचना पर सक्रिय हुई पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाने की पुलिस टीम थानाध्यक्ष शैलेंद्र कुमार के नेतृत्व में तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और जांच के दौरान मौके से एक राइफल, आठ जिंदा कारतूस तथा तीन खोखा (खाली कारतूस) बरामद करने में सफलता हासिल की। थानाध्यक्ष ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल टीम (फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) को भी साक्ष्य संकलन के लिए बुलाया गया है, ताकि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच को पुख्ता बनाया जा सके।
व्यवसायी कंचन सिंह की तहरीर पर दर्ज हुई प्राथमिकी
इस मामले में पीड़ित पक्ष के व्यवसायी कंचन सिंह के लिखित आवेदन पर स्थानीय थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। दर्ज प्राथमिकी में तीन लोगों को नामजद करते हुए कई अज्ञात लोगों को भी आरोपित बनाया गया है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं के साथ-साथ शस्त्र अधिनियम के तहत भी मामला पंजीकृत किया है। थानाध्यक्ष शैलेंद्र कुमार ने मीडिया को बताया कि आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) सुबोध कुमार के नेतृत्व में विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।
पैतृक संपत्ति विवाद की पृष्ठभूमि और कानूनी पहलू
जानकारों की मानें तो पैतृक संपत्ति का बंटवारा अक्सर परिवारों में गंभीर विवाद का कारण बनता है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 में संशोधन के बाद बेटियों को भी पैतृक संपत्ति में बराबर का अधिकार मिला है, जिससे कई बार बंटवारे की प्रक्रिया जटिल हो जाती है। इस मामले में दोनों पक्ष पटना में व्यवसाय करते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विवाद केवल जमीन के टुकड़े का नहीं, बल्कि आर्थिक हितों का भी है। उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, संपत्ति विवाद में हथियारों का प्रदर्शन या फायरिंग करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें कड़ी सजा का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश पुलिस ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए जानी जाती है।
गांव में तनाव, पुलिस बल तैनात
घटना के बाद से बरियारपुर गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। एहतियात के तौर पर गांव में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि चाचा-भतीजे के बीच चल रहा यह विवाद काफी पुराना है, लेकिन पहली बार इसने हिंसक रूप लिया है। पुलिस प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है और चेतावनी दी है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीएसपी सुबोध कुमार ने आश्वासन दिया है कि नामजद आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
फोरेंसिक जांच बनेगी मजबूत आधार
घटनास्थल पर बुलाई गई एफएसएल टीम ने मौके से फिंगरप्रिंट, बैलिस्टिक साक्ष्य और अन्य वैज्ञानिक नमूने एकत्र किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बरामद राइफल और कारतूस की फोरेंसिक जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि फायरिंग किस हथियार से और किस एंगल से की गई थी। यह साक्ष्य अदालत में अभियोजन पक्ष के लिए मजबूत आधार साबित होंगे। पुलिस ने बरामद हथियार को बैलिस्टिक जांच के लिए लैब भेज दिया है।
आमजन के लिए संदेश
इस घटना ने एक बार फिर समाज में संपत्ति विवाद के निपटारे के लिए कानूनी रास्ता अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। आपसी विवाद में हथियारों का प्रयोग न केवल जानलेवा साबित होता है, बल्कि पूरे परिवार और समाज को कानूनी पचड़ों में फंसा देता है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के भूमि या संपत्ति विवाद के लिए न्यायालय या राजस्व विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें, न कि बल प्रयोग का सहारा लें।
फिलहाल पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही हैं। थानाध्यक्ष ने दावा किया है कि जल्द ही सभी नामजद आरोपी सलाखों के पीछे होंगे। इस घटना ने बलिया जिले के ग्रामीण इलाकों में अवैध असलहों की मौजूदगी और संपत्ति विवाद की गंभीरता को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

