*कम्पनी रजिस्ट्रार ने दी तीन माह की अतिरिक्त मोहलत, चंद्रशेखरन की निदेशकता और उत्तराधिकारी चयन पर बनी रहेगी निगाह*
मृत्युंजय बर्मन
राष्ट्र संवाद संवाददाता, जमशेदपुर
टाटा संस की 18 अगस्त को कोरम पूरा नहीं होने के कारण स्थगित हुई 108वीं वार्षिक आम बैठक को लेकर नया महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। कंपनी रजिस्ट्रार ने 27 अगस्त के पत्र के जरिए टाटा संस को एजीएम आयोजित करने के लिए तीन माह की अतिरिक्त मोहलत देते हुए 31 दिसंबर 2026 तक का समय दिया है। मूल समयसीमा 30 सितंबर 2026 थी। बिजनेस स्टैंडर्ड ने सूत्रों के हवाले से कम्पनी रजिस्ट्रार के इस निर्णय की पुष्टि की है।
यह राहत 18 अगस्त के उस असाधारण घटनाक्रम के बाद मिली है, जब टाटा संस की एजीएम आवश्यक कोरम नहीं जुट पाने के कारण स्थगित करनी पड़ी थी। कंपनी के इतिहास में यह पहली ऐसी घटना बताई गई है। बैठक के एजेंडे में वित्त वर्ष 2025-26 के वित्तीय परिणाम, लाभांश और एन. चंद्रशेखरन की निदेशक के रूप में पुनर्नियुक्ति समेत महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल थे, लेकिन बैठक आगे नहीं बढ़ सकी।
एजीएम में कोरम का संकट एसआरटीटी पर महाराष्ट्र चैरिटी कमीश्नर की नियामकीय रोक से जुड़ा था। टाटा संस के आर्टिकल ऑफ एशोसिएशन में प्रमुख ट्रस्टों एसआरटीटी और एसडीटीटी द्वारा संयुक्त रूप से नामित प्रतिनिधित्व की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। एसआरटीटी पर लगी रोक के कारण यह प्रक्रिया प्रभावित हुई और बैठक स्थगित हो गई। एस एसआरटीटी स्वयं टाटा संस में करीब 23.5 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, जबकि टाटा ट्रस्ट्स की सामूहिक हिस्सेदारी करीब 66 प्रतिशत है।
कम्पनी रजिस्ट्रार की नई समयसीमा से टाटा संस को मौजूदा गतिरोध सुलझाने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कम्पनी रजिस्ट्रार ने कंपनी को भविष्य में कंपनी कानून की आवश्यकताओं के अनुपालन में विशेष सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। यदि एसआरटीटी से जुड़ा नियामकीय गतिरोध वर्ष के अंत तक बना रहता है, तो आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
अब 31 दिसंबर की नई समयसीमा ने टाटा संस के लिए तीन अहम सवाल एक साथ खड़े कर दिए हैं, एजीएम कब होगी, चंद्रशेखरन की निदेशकता का क्या होगा और उनके बाद टाटा संस की कमान किसे मिलेगी। इन्हीं फैसलों पर देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक के अगले नेतृत्व अध्याय की दिशा निर्भर करेगी।

