खाकी पर उठे सवालों का जवाब जरूरी है (डीसी लाउंज प्रकरण में जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय द्वारा उठाए गए मुद्दों पर)
राष्ट्र संवाद डेस्क
जमशेदपुर में डीसी लाउंज प्रकरण ने जिस तरह से कानून व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं, वह चिंता का विषय है। विधायक सरयू राय ने पूर्वी सिंहभूम के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भेजे पत्र में जो सवाल उठाए हैं, वे न केवल तर्कसंगत हैं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की मांग भी करते हैं।
डीसी लाउंज के साकची और बिष्टुपुर दोनों प्रतिष्ठानों में हुई हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में पुलिस की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा तभी कायम रहेगा जब हर स्तर पर पारदर्शिता बरती जाएगी। राय द्वारा उठाए गए सवाल — कि बिष्टुपुर थाना प्रभारी आधी रात को साकची क्षेत्र में क्यों पहुंचे, उन्होंने किनके निर्देश पर यह कार्रवाई की, और हमलावरों की मोटरसाइकिलें वापस क्यों दी गईं — यह सब ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर पुलिस को सार्वजनिक रूप से देना चाहिए।
यदि यह सच है कि बिष्टुपुर थाना के अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर न केवल घटनास्थल पर पहुंचे, बल्कि हमलावरों के पक्ष में व्यवहार किया, तो यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि कानून की आत्मा के खिलाफ भी है। खाकी का अर्थ सुरक्षा है — सत्ता या अपराधी तंत्र का संरक्षण नहीं।
सीसीटीवी फुटेज में जिस बर्बरता के दृश्य सामने आए हैं, वे यह दिखाते हैं कि घटना महज एक झगड़ा नहीं बल्कि सुनियोजित हिंसा थी। ऐसे में यदि जांच लीपापोती बनकर रह गई, तो इसका खामियाजा न केवल डीसी लाउंज प्रकरण में शामिल पक्षों को बल्कि पूरे शहर को भुगतना पड़ सकता है।
यह सवाल अब केवल एक प्रतिष्ठान या एक पुलिस अधिकारी तक सीमित नहीं हैं। यह सवाल हैं – कि क्या हमारी व्यवस्था में कानून सबके लिए समान है? क्या वर्दी के पीछे की जवाबदेही खत्म हो चुकी है? क्या पुलिस अपने ही अधीनस्थों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच कर पाएगी?
समय आ गया है कि जिला पुलिस प्रशासन इन सवालों को गंभीरता से ले, तथ्यों की बारीकी से जांच करे और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे। लोकतंत्र में सवाल उठाना नागरिक का अधिकार है और जवाब देना शासन की जिम्मेदारी।
अगर पुलिस चाहती है कि जनता उस पर भरोसा करे, तो उसे पारदर्शिता और निष्पक्षता से अपने आचरण का प्रमाण देना होगा। क्योंकि जब खाकी पर सवाल उठते हैं, तो केवल एक अधिकारी नहीं, पूरा तंत्र कटघरे में आ जाता है।

