आखिरी पल की डील ने बदल दिया उपराष्ट्रपति चुनाव का समीकरण
क्रॉस वोटिंग और रणनीति ने एनडीए के पक्ष में झुका वजन
राष्ट्र संवाद संवाददाता
नई दिल्ली: भारत के 15वें उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के प्रत्याशी सी.पी. राधाकृष्णन ने भारी अंतर से जीत हासिल की। उनके प्रतिद्वंद्वी सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट ही मिल सके। कुल 781 निर्वाचक सदस्य होने के बावजूद, मतदान में 767 मत डाले गए, जिसमें 15 वोट अमान्य पाए गए।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम पल की राजनीतिक डील और रणनीति ने परिणाम को निर्णायक रूप दिया। विपक्ष से 14 वोट क्रॉस होकर एनडीए के खाते में गए, जिससे राधाकृष्णन की जीत सुनिश्चित हुई।
मतदान और रणनीति: आंकड़ों की कहानी
कुल वोट: 767 (781 में से)
अमान्य वोट: 15
एनडीए वोट: 452 (427 आधार + 11 वायएसआर कांग्रेस + 14 क्रॉस वोट)
विपक्षी वोट: 300
वोट प्रतिशत: 98.2% मतदान
राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि उपराष्ट्रपति चुनाव केवल मतों का खेल नहीं, बल्कि अंतिम क्षण की रणनीति, समझौते और राजनीतिक चालों का भी परिणाम होता है। इस बार की क्रॉस वोटिंग और विपक्षी मतों का एनडीए में शामिल होना इसका प्रमाण है।

इस चुनाव ने साफ कर दिया कि अंतिम क्षण की राजनीतिक चालें चुनाव के परिणाम को बदल सकती हैं। विपक्ष की कोशिशें और दक्षिण भारत के उम्मीदवार को मैदान में उतारने की रणनीति सफल नहीं रही। एनडीए की रणनीति ने उन्हें 452 मतों के साथ स्पष्ट जीत दिलाई।


