Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » भारत के महान कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का निधन, हरित क्रांति के जनक के रूप में थे मशहूर
    Breaking News Business Headlines राष्ट्रीय

    भारत के महान कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का निधन, हरित क्रांति के जनक के रूप में थे मशहूर

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 28, 2023No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

     

     

    भारत के महान कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का निधन, हरित क्रांति के जनक के रूप में थे मशहूर
    भारत के जाने-माने वैज्ञानिक एमएस हरित क्रांति  के जनक एमएस स्वामीनाथन का गुरुवार को निधन हो गया है। हरित क्रांति  के जनक एमएस स्वामीनाथन ने 98 साल की उम्र में तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में अंतिम सांस ली। लंबी उम्र के कारण उनको काफी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां थीं। प्रोफेसर स्वामीनाथन एक प्रसिद्ध कृषि विज्ञानी थे, जिन्हें भारत में गेहूं और चावल की उच्च उपज देने वाली किस्मों को पैदा करने और इन उपभेदों को और विकसित करने का श्रेय दिया जाता है।

     

    अमरीकी वैज्ञानिक के साथ किया था काम
    कृषि विभाग में वैज्ञानिक रहे स्वामीनाथन ने 1972 से 1979 तक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया था। भारत को अकाल से बचाने और खाद्यान सुरक्षा दिलाने के लिए उन्होंने अमरीकी वैज्ञानिक नॉर्मन बोरलॉग के साथ 1960 के दशक में काम किया था।

     

    कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से किया गया सम्मानित
    एमएस स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति का अगुआ माना जाता है। वे पहले ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने सबसे पहले गेहूं की एक बेहतरीन किस्म को पहचाना। इसके कारण भारत में गेहूं उत्पादन में भारी वृद्धि हुई। स्वामीनाथन को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उनको पद्मश्री (1967), पद्मभूषण (1972), पद्मविभूषण (1989), मैग्सेसे पुरस्कार (1971) और विश्व खाद्य पुरस्कार (1987) महत्वपूर्ण सम्मान मिल चुके हैं।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleमणिपुर हिंसा: इंफाल में फिर भड़की हिंसा, डीसी दफ्तर में तोड़फोड़, 2 गाड़ियों में लगाई आग
    Next Article आदित्यपुर शेरे पंजाब चौक स्थित दयाल ट्रेड सेंटर भवन में त्रिनेत्रम आई हॉस्पिटल का हुआ शुभारंभ ,स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और सांसद विद्युत वरण महतो ने किया अस्पताल का उद्घाटन

    Related Posts

    हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम, उद्यमियों को दी गई अहम जानकारी

    June 17, 2026

    रांची में आरएसएस कार्यालय पर हमला: लोकतंत्र के लिए ख़तरा

    June 17, 2026

    जिला योजना समिति की बैठक में 139 विकास योजनाओं पर मंथन, 38 योजनाओं को मिली स्वीकृति

    June 17, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम, उद्यमियों को दी गई अहम जानकारी

    रांची में आरएसएस कार्यालय पर हमला: लोकतंत्र के लिए ख़तरा

    जिला योजना समिति की बैठक में 139 विकास योजनाओं पर मंथन, 38 योजनाओं को मिली स्वीकृति

    रांची में आरएसएस कार्यालय हमले की जांच तेज: एसआईटी, एनआईए जुटी

    अमेरिका ने बदला ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ का नाम: भारत के लिए रणनीतिक संदेश?

    मोदी-ट्रंप वार्ता: भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर ज़ोर

    झारखंड राज्यसभा चुनाव: सियासी हलचल और रिजॉर्ट राजनीति

    सुबह झमाझम बारिश, दोपहर में निकली तेज धूप; जमशेदपुर में फिर बढ़ा तापमान

    21 जून को गुरुद्वारा साहिब साकची में सजेगा भव्य कीर्तन दरबार, बीबी जसप्रीत कौर करेंगी गुरुबाणी कीर्तन

    पानी को दूषित किए जाने से और पेड़ काटे जाने से ग्रामीणों में नाराजगी

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.