महामारी की इस अवस्था में धैर्य बनाकर रखने की जरूरत है ।व्यक्तिगत दूरी ,मास्क का प्रयोग और घर में एक दूसरे के कार्य में सहयोग की भावना और ईश्वर के प्रति समर्पण इस विकट परिस्थिति निजात पाने में सहायता प्रदान करेगा
जमशेदपुर 3 अगस्त:जमशेदपुर एवं आसपास के लगभग 5 हजार से भी ज्यादा आनंद मार्गी मोबाइल लैपटॉप एवं अन्य अत्याधुनिक माध्यमों से वेब टेलीकास्ट प्रवचन का लाभ उठाया।श्रावणी पूर्णिमा के अवसर आनंद मार्ग प्रचारक संघ के
पुरोधा प्रमुख श्रद्धेय आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत ने साधकों को ऑनलाइन संबोधित किए
उन्होंने कहा कि आज से 81 वर्ष पूर्व वर्ष 1939 में प्रथम दीक्षा हुई थी और आज 2020 में आनंद मार्ग समग्र दुनिया के 170 देशों में फैल गया है जहां साधक साधिका योग साधना का लाभ उठा रहे हैं ।
उन्होंने कहा कि मनुष्य साधना ,सेवा और त्याग से महान बनता है ।मनुष्य के जीवन की सार्थकता इन्हीं तीन चीजों पर निर्भर करती है ।आगे उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि नैतिकता साधना की आधार भूमि है। साधना लक्ष्य प्राप्त करने का माध्यम है। दिव्य जीवन की प्राप्ति मनुष्य जीवन का लक्ष्य है। मनुष्य नीति को जितनी कठोरता से मान कर चलेंगे उनका जीवन उतना ही सहज हो जाएगा।
करुणा वायरस के कारण उत्पन्न महामारी की इस अवस्था में धैर्य बनाकर रखने की जरूरत है ।व्यक्तिगत दूरी ,मास्क का प्रयोग और घर में एक दूसरे के कार्य में सहयोग की भावना और ईश्वर के प्रति समर्पण इस विकट परिस्थिति निजात पाने में सहायता प्रदान करेगा। ।

