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    Home » नेपाल : संसद भंग करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को भेजा कारण बताओ नोटिस
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    नेपाल : संसद भंग करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को भेजा कारण बताओ नोटिस

    Devanand SinghBy Devanand SinghDecember 26, 2020No Comments3 Mins Read
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    काठमांडू. नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने संसद भंग करने वाले फैसले को लेकर नेपाल सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. गौरतलब है कि रविवार को राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की अनुशंसा पर प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया था और मध्यावधि चुनावों की घोषणा कर दी थी.

    बता दें, इससे पहले नेपाल के उच्चतम न्यायालय ने संसद भंग करने के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के फैसले के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को बुधवार को संविधान पीठ के पास भेज दिया था. वहीं, सत्तारूढ़ पार्टी पर नियंत्रण के लिए नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के दोनों धड़ों के बीच संघर्ष और तेज हो गया है. प्रधान न्यायाधीश चोलेंद्र एसजेबी राणा की एकल पीठ ने प्रतिनिधि सभा को भंग करने के खिलाफ दायर 12 अलग-अलग याचिकाओं पर आरंभिक सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. संविधान पीठ में याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई शुरू हुई.

    क्या दी थीं वकीलों ने दलीलें

    आरंभिक सुनवाई के दौरान बुधवार को वरिष्ठ वकीलों ने संविधान के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए दलीलें दीं कि प्रधानमंत्री ओली के पास संसद को भंग करने का अधिकार नहीं है क्योंकि वैकल्पिक सरकार के गठन की संभावना है. एक याचिकाकर्ता के वकील दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि संविधान के मुताबिक बहुमत वाली संसद को भंग किए जाने पर नया जनादेश लेने के पहले दो या दो से ज्यादा राजनीतिक दलों द्वारा वैकल्पिक सरकार के गठन का रास्ता तलाशा जा सकता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ओली प्रतिनिधि सभा को अचानक भंग कर वैकल्पिक सरकार के गठन की प्रक्रिया को बाधित नहीं कर सकते.

    अंतरिम आदेश का अनुरोध

    याचिकाकर्ताओं ने फैसले के खिलाफ अंतरिम आदेश का भी अनुरोध किया लेकिन शीर्ष अदालत ने ऐसा कोई आदेश जारी करने से इनकार कर दिया. बहरहाल, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ को प्रधानमंत्री ओली के स्थान पर बुधवार को संसदीय दल का नेता चुना गया. वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल ने संसद भवन में प्रचंड (66) के नेतृत्व वाले खेमे के संसदीय दल की बैठक के दौरान प्रचंड के नाम का प्रस्ताव रखा. इससे पहले केंद्रीय कमेटी ने वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल को पार्टी का दूसरा अध्यक्ष चुना. प्रचंड पार्टी के पहले अध्यक्ष हैं.

    ओली को पद से हटाया

    पार्टी के प्रचंड खेमे की केंद्रीय कमेटी ने मंगलवार को बैठक कर ओली (68) को अध्यक्ष पद से हटा दिया और प्रतिनिधि सभा को असंवैधानिक रूप से भंग करने के लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का फैसला किया. प्रचंड ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता भंग की गयी प्रतिनिधि सभा को बहाल करने और नई सरकार के गठन की है. उन्होंने कहा, मैं सभी लोकतांत्रिक ताकतों और राजनीतिक दलों को एकजुट करूंगा ताकि राजनीतिक व्यवस्था सही से काम करे और संसद का काम सुचारू रूप से चले.

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