नयी दिल्ली में नीट विवाद को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। पार्टी ने साफ शब्दों में कहा है कि इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पृष्ठभूमि: नीट विवाद और छात्रों का आक्रोश
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) 2024 के परिणाम जारी होने के बाद से ही देशभर में छात्रों और अभिभावकों में भारी रोष व्याप्त है। पेपर लीक, अनियमितताओं और ग्रेस मार्क्स देने के विवादास्पद फैसले ने परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचने के बाद भी अनिश्चितता बनी हुई है। 3 मई को परीक्षा रद्द होने की खबरों के बीच कई राज्यों में छात्रों द्वारा आत्महत्या के दुखद मामले सामने आए, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई। इस पृष्ठभूमि में विपक्षी दल और छात्र संगठन लगातार शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। नीट परीक्षा के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है।
कॉजपा की प्रमुख मांगें: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग समेत
नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) से जुड़े विवाद के खिलाफ प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने केंद्रीय मंत्रियों से शुक्रवार को कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उसकी मांग को लेकर ‘‘कोई समझौता नहीं हो सकता।’’
कॉजपा ने तीन मई को हुई ‘‘नीट परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले’’ छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिए जाने की भी मांग की।
कॉजपा के दो प्रतिनिधियों ने यहां विट्ठलभाई पटेल हाउस में केंद्रीय मंत्रियों जे. पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ करीब दो घंटे तक चली बैठक में ये मांगें रखीं।
कॉजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास ने सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने केंद्रीय मंत्रियों से स्पष्ट कर दिया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की हमारी मांग पर कोई समझौता नहीं हो सकता।’’
दास ने कहा कि कॉजपा ने आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियां वापस लेने की मांग भी की है।
नड्डा ने कहा कि मंत्रियों ने कॉजपा के प्रतिनिधियों की मांगें सुनीं और कहा कि सरकार इस संबंध में उन्हें बाद में जवाब देगी।
उन्होंने कहा, ‘‘हम शनिवार को फिर बैठक करेंगे।’’
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आगे की राह
इस बैठक को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा और कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में आयोजित किया गया, जो दर्शाता है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। हालांकि, सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन न मिलना और अगली बैठक शनिवार तक टाल देना यह संकेत देता है कि मामला अभी लंबा खिंच सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कॉजपा का यह कदम विपक्षी एकता को मजबूत करने की दिशा में एक प्रयास हो सकता है। छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है और देश की निगाहें अब शनिवार की बैठक के नतीजे पर टिकी हैं। [INTERNAL_LINK_HOLDER]
निष्कर्ष
नीट विवाद ने न केवल शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर किया है, बल्कि यह राजनीतिक दलों के लिए भी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कॉजपा का अड़िग रुख और पीड़ित परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि शनिवार की बैठक से कोई सकारात्मक हल निकलता है या गतिरोध जारी रहता है।

