लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
पोटका प्रखंड के धीरोल पंचायत अंतर्गत नुतन्डीह गांव में सरकारी जमीन पर कब्जा का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। यह मामला न केवल जमीन की खरीद-बिक्री में धोखाधड़ी को उजागर करता है, बल्कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में जमीन के हस्तांतरण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि बाहरी तत्वों द्वारा सुनियोजित तरीके से सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया गया और अब उसे छिपाने के लिए मूल रैयतों पर ही दबाव बनाया जा रहा है। आज इस मुद्दे को लेकर ग्रामीणों की एक अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस प्रकरण पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए दोषियों पर अविलंब कार्रवाई की मांग प्रशासन से की है। अधिक जानकारी के लिए आप झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
सरकारी जमीन पर कब्जा का पूरा मामला
पोटका। पोटका प्रखंड के धीरोल पंचायत अंतर्गत नुतन्डीह में सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले अब जमीन विक्रेताओ को ही धमकाने लगे है। वे विभिन्न तरह से जमीन विक्रेताओ पर पैसा लौटाने का दबाब बना रहे है। जमीन खरीदने वाले अब सरकारी जमीन का पैसा मांग रहे है। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि हमने अपना रैयत जमीन का बिक्री किया है। जमीन के खरीदार अब अपना दोष जमीन विक्रेताओ पर मढ़ रहे है।
विदित हो कि बांगो गांव के कुछ लोगो ने मिलकर जमशेदपुर निवासी के हाथ तीन एकड़ 58 दिशमल जमीन खरीदा। चुकी यह जमीन नुतन्डीह गांव के अंतिम छोड़ पर था जहाँ आम आदमी का आना जाना बहुत कम होता है। इसीलिए जमीन क्रेताओं ने तीन एकड़ 10 दिसमल जमीन सरकारी जमीन का अतिक्रमण कर उसे अपने कब्जे में कर लिया। लेकिन यह चालाकी उनका काम नहीं आया। मामला उजागर हो गया। पोटका अंचल पदाधिकारी के द्वारा जेपीएलई का मामला दर्ज भी कर दिया गया है तथा 14 दिनों के अंदर उन्हें जबाब भी देना है।
सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालो पर कार्रवाई होना चाहिए:::: लक्ष्मी रानी मुंडा
धीरोल पंचायत के पंचायत समिति सदस्य लक्ष्मी रानी गोप ने मांग किया है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वालो पर शख्त कार्रवाई हो। उन्होंने कहा है कि जब यह पांचवी अनुसूचिग क्षेत्र के अन्तर्गग आता है तब किसी दूसरे प्रखंड के लोगो को जमीन खरीदने का परमिशन किसने दिया। जितना जमीन का खरीदारी नहीं किया उतना जमीन का अतिक्रमण किया। ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर झारखंड के आदिवासी बहुल इलाकों में जमीन की लूट और प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती को उजागर कर दिया है। सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे कानून को ठेंगा दिखाते हुए रैयतों को ही धमकाने लगे हैं। पोटका अंचल पदाधिकारी द्वारा जेपीएलई (झारखंड पब्लिक लैंड इनक्रोचमेंट एक्ट) के तहत मामला दर्ज करना एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन ग्रामीणों को आशंका है कि राजनीतिक दबाव में कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली जाए। लक्ष्मी रानी गोप द्वारा उठाया गया पांचवीं अनुसूची क्षेत्र का मुद्दा बेहद अहम है, क्योंकि संविधान की इस धारा के तहत आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री गैर-आदिवासियों के लिए प्रतिबंधित या विनियमित है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन 14 दिनों की मोहलत के बाद क्या ठोस कार्रवाई करता है। ग्रामीणों की आज की बैठक इस आंदोलन की दिशा तय करेगी। उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकारी जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराएगा और दोषियों को सजा दिलाएगा।

