राष्ट्र संवाद संवाददाता
बहरागोड़ा :झारखंड में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था ने झोलाछाप चिकित्सकों के हवाले अपने नागरिकों को कर दिया है समुचित संख्या में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कर्मियों के अभाव के कारण ही ग्रामीण क्षेत्र के लोग ऐसे तथाकथित चिकित्सकों के पास जाने के लिए मजबूर हो गए हैं.
घटना बहरागोड़ा थाना क्षेत्र के मौदा निवासी उत्तम कुमार शीट(40) की तबीयत 2 दिन पहले बिगड़ी थी दस्त होने पर चौरंगी स्थित गैर लाइसेंसी दवा दुकान सह क्लीनिक में बैठने वाले तथाकथित चिकित्सक ने घर जाकर उपचार किया था. प्रारंभ में उसे दस्त रोकने एवं बुखार उतरने की दवा दी गई थी गुरुवार की रात तबीयत जब और नाजुक हुई तो दूसरी दवाई दी गई शुक्रवार की सुबह सांस लेने में मरीज को काफी परेशानी हो रही थी तो उक्त चिकित्सक ने डेक्सोना डेरीफिलिन पान 40 जैसी इंजेक्शन एवं कुछ दवाई दी गई जानकारी के मुताबिक उक्त इंजेक्शन सांस लेने में अगर किसी व्यक्ति बहुत अधिक तकलीफ हो रही हो तब आपात स्थिति में एक निश्चित मात्रा में इसका उपयोग किया जाता है एमबीबीएस एवं नियमित अस्पताल और क्लिक चलाने वाले डॉक्टर एवं झोलाछाप डॉक्टर में यही अंतर है क्योंकि डॉक्टरी के नाम पर दुकान चलाने वाले को किसी रोग में कौन सा दवा देना है इसकी जानकारी हो सकती है लेकिन वास्तविक चिकित्सक को ही डोज की जानकारी होती है. यही कारण है कि अमरेंद्र पात्रा जो कि उड़ीसा जानकीदईपुर (रतीला) झरपोखरिया थाना ओडिशा का रहने वाला है की लापरवाही के चलते युवक की मौत हो गई इस घटना को लेकर परिजन एवं स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है घटना के बाद उक्त युवक को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया तत्काल पुलिस द्वारा शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. पोस्टमार्टम के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा की मृत्यु का कारण क्या था मृतक के पिता चतुर्भुज शीट जो बैंक से सेवानिवृत कर्मचारी उन्होंने मौखिक तौर पर इस घटना के लिए चिकित्सक को जिम्मेदार ठहराया है उन्होंने यह भी कहा कि अमरेंद्र पत्रा के विरुद्ध हत्या से संबंधित नामजद प्राथमिक की दर्ज कराया जाएगा. घटना के बाद आरोपी चिकित्सक अपना क्लीनिक बंद कर फरार हो गया. जिसका मोबाइल भी स्विच ऑफ बता रहा है.

