यूसीआईएल में 7 करोड़ भुगतान के बाद भी दवा संकट, मरीज परेशान
16 करोड़ के टेंडर में 28% छूट पर के-फार्मा को मिला ठेका, ब्रांडेड की जगह जेनेरिक दवा देने का आरोप
यूनियन ने टेंडर रद्द कर ब्लैकलिस्ट करने की मांग की
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा। यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के अस्पताल में दवा संकट से मरीज परेशान हैं। दवा आपूर्ति के नाम पर करीब 7 करोड़ रुपये का भुगतान होने के बावजूद मरीजों को समय पर दवाएं नहीं मिल रही हैं। जुलाई 2025 में दो वर्षों के लिए 16 करोड़ रुपये का टेंडर 28 प्रतिशत छूट पर हासिल करने वाली के-फार्मा पर टेंडर की शर्तों के विपरीत ब्रांडेड दवाओं की जगह जेनेरिक दवाएं देने का आरोप है।
अस्पताल प्रबंधन की ओर से 48 घंटे में दवा उपलब्ध कराने की चेतावनी के बावजूद मरीजों को चार-चार दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। जादूगोड़ा, नरवा और आसपास के दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों व पूर्व कर्मचारियों को भी दवा के बिना लौटना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, कंपनी पर कई बार जुर्माना लगाने के बाद भी आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है। यूनियन नेताओं ने प्रबंधन से टेंडर रद्द कर कंपनी को काली सूची में डालने की मांग की है। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के भुगतान के बावजूद मरीजों को दवा क्यों नहीं मिल रही है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी? मरीजों के हित में तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

