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    Home » रुगड़ी घाट पर अवैध बालू का खेल, दिनदहाड़े उठाव से ग्रामीणों में आक्रोश
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    रुगड़ी घाट पर अवैध बालू का खेल, दिनदहाड़े उठाव से ग्रामीणों में आक्रोश

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarMarch 6, 2026No Comments2 Mins Read
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    रुगड़ी घाट पर अवैध बालू का खेल, दिनदहाड़े उठाव से ग्रामीणों में आक्रोश

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    चांडिल। चांडिल प्रखंड सह अंचल क्षेत्र के रुगड़ी, मानिकुई ,स्थित सुवर्णरेखा नदी घाट पर अवैध बालू कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। दिनदहाड़े हजारों सिफ्टी बालू का उठाव किए जाने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन की कथित मिलीभगत के कारण बालू माफियाओं का हौसला बुलंद है और कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है।

    ग्रामीणों का कहना है कि राज्य सरकार गरीबों के लिए जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत आबुआ आवास योजना के माध्यम से घर उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल अलग है। प्रशासनिक तंत्र में बैठे कुछ अधिकारियों, पदाधिकारियों और पुलिस की कथित मिलीभगत से बालू की कालाबाजारी चरम पर पहुंच गई है।

    बताया जाता है कि बालू माफिया ट्रैक्टरों के माध्यम से नदी घाटों से बालू उठाकर सुनसान स्थानों पर बड़े पैमाने पर स्टॉक कर रहे हैं। इसके बाद रात के अंधेरे में हाइवा जैसे भारी वाहनों से बालू को जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में खपाया जा रहा है।

    इधर अवैध कारोबार के कारण बालू की कीमत आसमान छू रही है। जहां एक ट्रैक्टर बालू की कीमत 5 हजार से 6 हजार रुपये तक वसूली जा रही है। महंगी दरों के कारण गरीबों के लिए घर बनाना मुश्किल हो गया है। परिणामस्वरूप सरकार की आवास योजनाएं अधूरी पड़ी हैं।

    ग्रामीणों का आरोप है कि प्रखंड और अंचल कार्यालय के साथ-साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले को नजरअंदाज कर रहा है। कई बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    सूत्रों की मानें तो बालू माफियाओं को संरक्षण देने के नाम पर हर महीने लाखों रुपये की वसूली किए जाने की भी चर्चा है।

    ऐसे में सवाल उठने लगा है कि जब बालू की कालाबाजारी ही नहीं रुकेगी तो गरीबों के आवास कैसे बनेंगे? प्रखंड और अंचल कार्यालयों के कागजों में आवास योजनाओं के आंकड़े कुछ और दिखते हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

    ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही अवैध बालू उठाव और कालाबाजारी पर रोक नहीं लगी, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।जिसकी जिम्मेवारी पुलिस प्रशासन की होंगी.

    दिनदहाड़े उठाव से ग्रामीणों में आक्रोश रुगड़ी घाट पर अवैध बालू का खेल
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