यूसीआईएल में बीते चार दिनों से मिल पूरी तरह बंद
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा. यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) में बीते चार दिनों से मिल पूरी तरह बंद है। टेलिंग पौंड में जाने वाली पाइप ग्रामीणों ने काट दी है। इससे अयस्क की पिसाई रुक गई है। रोजाना करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। यह पहली बार हुआ है जब ग्रामीणों के विरोध के कारण मिल चार दिन तक बंद रहा।

ग्रामीणों का आरोप है कि यूसीआईएल 28 साल से वादाखिलाफी कर रहा है। उनका कहना है कि जब तक उनकी पूर्णवास की मांगें पूरी नहीं होंगी, वे पाइप नहीं जोड़ने देंगे। ग्रामीणों का धार्मिक स्थल यूसीआईएल के कचरा पानी से दूषित हो गया है। इससे वे पूरी तरह आक्रोशित हैं।

यूसीआईएल के अधिकारी और सी एम डी ग्रामीणों से बातचीत कर समाधान नहीं निकाल पा रहे हैं। दूसरी ओर, यूसीआईएल अस्पताल में दो महीने से मरीजों को दवा नहीं मिल रही है। मरीज परेशान हैं। पूर्व कर्मचारी, खासकर बुजुर्ग, बिना दवा के जान जोखिम में डालकर जी रहे हैं। कभी भी बड़ी घटना हो सकती है।
कैंटीन की व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई है। कैंटीन बंद होने से मजदूर परेशान हैं। कई मजदूर दोपहर 3 बजे के बजाय 1 बजे ही घर लौट रहे हैं। इससे उत्पादन पर असर पड़ रहा है। अधिकारी भी मजदूरों पर दबाव नहीं बना पा रहे हैं।

संयुक्त यूनियन के नेताओं का कहना है कि यूसीआईएल के अधिकारी पूरी तरह निष्क्रिय हो गए हैं। प्रभारी सी एम डी के कारण कोई बड़ा निर्णय नहीं हो पा रहा है। इसका खामियाजा प्रबंधन को भुगतना पड़ रहा है। मजदूरों की सुविधाएं लगातार घट रही हैं। कई वर्षों से उन्हें जूते और कपड़े नहीं मिले हैं। सुरक्षा के साधन भी कम कर दिए गए हैं। इससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।
विस्थापित भी रोजगार की मांग को लेकर दबाव बना रहे हैं। डीसी ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। लेकिन यूसीआईएल के अधिकारी समाधान नहीं निकाल पा रहे हैं। इससे हड़ताल और बंदी की नौबत आ रही है।

जादूगोड़ा मजदूर यूनियन के पूर्व महासचिव बी. एन चौधरी ने कहा कि पहले यूसीआईएल की व्यवस्था बेहतर थी। अब हालात बिगड़ गए हैं। इसकी जांच होनी चाहिए। मजदूरों का कहना है कि प्रभारी सीएमडी के कारण ही परेशानी बढ़ी है। वे जर्जर क्वार्टर में रहने को मजबूर हैं। सुविधाओं में भारी कटौती हो रही है।
पानी भी गुणवत्तापूर्ण नहीं मिल रही है

