लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
UCIL की हीरक जयंती के अवसर पर जादूगोड़ा में आयोजित हीरक जयंती समारोह प्रबंधन और मजदूर संगठनों के बीच टकराव का केंद्र बन गया है। यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) देश की परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की रीढ़ मानी जाती है और इसकी स्थापना के 60 वर्ष पूरे होना एक ऐतिहासिक पड़ाव है। हालांकि, इस स्वर्णिम अवसर पर जश्न के बजाय विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं, जो संस्थान के आंतरिक हालात पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
UCIL की हीरक जयंती पर मजदूर यूनियनों के गंभीर आरोप
राष्ट्र संवाद संवाददाता जादूगोड़ा, राष्ट्र संवाद: यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) की 60वीं हीरक जयंती समारोह के बीच प्रबंधन की कार्यशैली को लेकर मजदूर संगठनों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जादूगोड़ा और आंध्र प्रदेश के तुमलापल्ली प्रोजेक्ट की तीन यूनियनों ने समारोह का बहिष्कार किया। वहीं परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष एवं समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. अजीत कुमार मोहंती के अंतिम समय में दौरा रद्द करने से भी आयोजन चर्चा में आ गया।
सुमो यूनियन के पूर्व महासचिव प्रदीप कुमार भगत ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये समारोह पर खर्च किए जा रहे हैं, जबकि UCIL कॉलोनी में सड़क, पानी और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं बदहाल हैं। उनका दावा है कि अस्पताल में डॉक्टर और जरूरी दवाओं की कमी है तथा लंबे समय से कार्यरत मजदूरों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी सवाल हैं।
भगत ने CSR गतिविधियों में कमी, मजदूरों की कैंटीन की बदहाली और इस वर्ष अब तक वर्दी का कपड़ा नहीं मिलने का भी आरोप लगाया। उन्होंने अधिकारियों और मजदूरों के बीच सुविधाओं में कथित असमानता पर सवाल उठाते हुए प्रबंधन से जवाब मांगा।
पूर्व कर्मी विद्या शर्मा ने भी बकाया भुगतान लंबित होने का आरोप लगाया। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो हीरक जयंती के बाद आंदोलन तेज किया जाएगा।
प्रबंधन के लिए चुनौती बने अनसुलझे सवाल
सवाल यह है कि जिस संस्थान की 60वीं वर्षगांठ पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, क्या उसके मजदूर और आसपास की कॉलोनियां वास्तव में उस विकास की हकदार नहीं हैं? जश्न की रोशनी के बीच उठते ये सवाल UCIL प्रबंधन के लिए गंभीर चुनौती हैं।
यह विवाद सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में श्रमिक कल्याण और प्रबंधन की प्राथमिकताओं पर एक बार फिर बहस को तेज करता है। UCIL न केवल झारखंड बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में इसके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन जमीनी स्तर पर श्रमिकों की उपेक्षा संस्थान की छवि को धूमिल कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रबंधन को तत्काल संवाद स्थापित कर मजदूरों की जायज मांगों पर विचार करना चाहिए ताकि औद्योगिक शांति बनी रहे। अधिक जानकारी के लिए आप परमाणु ऊर्जा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।

