देवानंद सिंह
मानगो नगर निगम में मेयर सुधा गुप्ता और जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय के बीच अधिकारों और कार्यप्रणाली को लेकर जिस तरह का सार्वजनिक टकराव सामने आया है, वह केवल दो जनप्रतिनिधियों के बीच का विवाद नहीं है। इसके केंद्र में नगर निगम की कार्यप्रणाली, निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका और जनता के प्रति जवाबदेही का बड़ा सवाल है। लोकतंत्र में सवाल उठाना जनप्रतिनिधियों का अधिकार है, लेकिन उन सवालों का समाधान भी संस्थागत व्यवस्था और नियम-कानून के दायरे में ही होना चाहिए।
मेयर का यह कहना उचित है कि नगर निगम का प्रशासनिक संचालन निर्धारित कानून और प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। वहीं विधायक का यह दायित्व भी है कि वे अपने क्षेत्र की जनता से जुड़े सड़क, पानी, सफाई, नाली, बिजली और अन्य समस्याओं को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगें। दोनों पक्षों की भूमिकाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन उद्देश्य एक ही होना चाहिए जनहित।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टेंडर, वर्क ऑर्डर, बिल और भुगतान जैसे मामलों में यदि किसी प्रकार की अनियमितता का संदेह है तो आरोप-प्रत्यारोप के बजाय दस्तावेज सामने आने चाहिए और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि सब कुछ नियम के अनुसार है तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए। इससे न केवल विवाद समाप्त होगा, बल्कि जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।
दूसरी ओर, निगम के निर्वाचित पार्षदों की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वार्ड पार्षद सीधे जनता के बीच से आते हैं और अपने क्षेत्र की समस्याओं को निगम की बैठकों में उठाना उनका अधिकार है। यदि पार्षदों और मेयर के बीच मतभेद हैं तो उसका समाधान बैठक, नियम और संवाद के माध्यम से होना चाहिए, न कि सार्वजनिक बयानबाजी के जरिए।
सरयू राय और सुधा गुप्ता दोनों अनुभवी जनप्रतिनिधि हैं। ऐसे में उनसे जनता टकराव नहीं, समाधान की अपेक्षा करती है। राजनीतिक बयानबाजी से सड़क नहीं बनेगी, नाली साफ नहीं होगी और जलजमाव की समस्या दूर नहीं होगी। मानगो की जनता को यह जानने में अधिक रुचि है कि विकास योजनाएं कब पूरी होंगी और नगर निगम की व्यवस्था कब बेहतर होगी।
इसलिए जरूरी है कि दोनों पक्ष व्यक्तिगत आरोपों से ऊपर उठकर संस्थागत संवाद का रास्ता अपनाएं। विधायक जनहित के मुद्दों पर सवाल उठाएं, मेयर और निगम प्रशासन नियमों के तहत जवाब दें और पार्षद अपनी जिम्मेदारी निभाएं। बहरहाल जीत किसी व्यक्ति या राजनीतिक गुट की नहीं, मानगो की जनता और सुशासन की होनी चाहिए।

