लेखक: इंद्र यादव
अयोध्या साइबर थाने के दारोगा-सिपाही राजस्थान में रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए हैं, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
अयोध्या साइबर थाने के दारोगा-सिपाही राजस्थान में रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े
इंद्र यादव/यूपी।/आयोध्या,मुकदमे से नाम हटाने के नाम पर रिश्वत का धंधा करते हुए सीकर में ACB ने ऐसे दबोचा कि माथे पर हाथ रख लो।
भाई साहब, सुनो कहानी। अयोध्या साइबर थाने के दारोगा और तीन सिपाही राजस्थान की हवा खाने निकले थे। मकसद! पीड़ित के भाई का नाम मुकदमे से गायब करवाने के एवज में मोटा घूस लेना। और ये घूस लेते-लेते ऐसे फंसे कि अब खुद मुकदमे में नाम दर्ज होने वाला है।
राजस्थान ACB वाले जागे हुए निकले। मंगलवार को सीकर में ₹2.80 लाख की गड्डी हाथ में पकड़े हुए चारों को रंगे हाथ धर लिया। गिरफ्तार हुए नाम हैं!
गिरफ्तार पुलिसकर्मियों के नाम
- सब-इंस्पेक्टर यशवंत सिंह (जिनको दारोगा जी कहके बुलाया जाता होगा)
- कांस्टेबल पवन त्रिपाठी
- सोहनलाल
- गौरव चिराग
कहानी कुछ यूं है — अयोध्या साइबर थाने में एक केस दर्ज था। पीड़ित के भाई का नाम उसमें था। नाम हटवाना था तो ये महाशय सामने आ गए। कांस्टेबल गौरव चिराग साहब ने पहले ₹4 लाख का रेट बताया। फिर सौदा पक्का हुआ ₹2.80 लाख पर। मतलब थोड़ी मोलभाव की गुंजाइश रखी गई, जैसे सब्जी मंडी में।
राजस्थान ACB ने पूरा जाल बिछाया। पैसा लेते वक्त चारों को ऐसे पकड़ा जैसे कोई पकौड़े तल रहा हो और अचानक तेल में हाथ डाल दिया हो। ACB के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने खुद पुष्टि की है।
अब सोचो जरा। अयोध्या में साइबर क्राइम रोकने वाले भाई-लोग खुद साइबर-रिश्वत का धंधा कर रहे थे। मुकदमे से नाम हटाना हो तो अयोध्या से सीकर तक सफर करना पड़ता है। कितनी मेहनत! कितनी लगन!
रिश्वत लेने के लिए इतनी दूर जाना… ये तो समर्पण है यार।
अब ये चारों राजस्थान की जेल की हवा खाएंगे। अयोध्या साइबर थाने में शायद अब नया दारोगा आएगा जो मुकदमे से नाम नहीं हटाएगा, बल्कि रिश्वत का रेट और बढ़ाएगा। कौन जाने।
सच्चाई ये है कि कुछ पुलिस वाले इतने ईमानदार हैं कि घूस भी रंगे हाथ नहीं ले सकते। पकड़े ही जाते हैं। बाकी जो चतुर हैं, वो घर बैठे ही काम निकाल लेते हैं।
अयोध्या का साइबर थाना अब शायद “रिश्वत थाना” नाम से भी जाना जाएगा। लेकिन फिलहाल तो चारों भाई सीकर में ACB की मेहमाननवाजी का लुत्फ उठा रहे हैं।
इस घटना ने पुलिस व्यवस्था में भ्रष्टाचार की जड़ों को फिर से उजागर किया है। राजस्थान ACB की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है। अधिक जानकारी के लिए ACB राजस्थान की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

