मानवता के लिए उषा की किरण जगाती पुस्तक *वैचारिकी* ग्राहक पंचायत , पूर्वी सिंहभूम जिले के अंतर्गत प्रकाशित।
*****एक समीक्षा*****

यह पुस्तक सिर्फ मनोरंजन के लिए रचा गया साहित्य नहीं , बल्कि बच्चे, बूढ़े और युवाओं के साथ-साथ, सभी अमीर-ग़रीब, शिक्षित-अशिक्षित और शहरी – ग्रामीणों की बाजारवाद की चकाचौंध से चौंधिआई आँखों के लिए एक “आईड्रॉप” की तरह है। इसे आँखों में डालने (वैचारिकी पढ़ने) के बाद दृष्टि का न सिर्फ़ धुँधलापन छंटता है बल्कि पूँजीवादियों का छल-प्रपंच शीशे की तरह बिल्कुल साफ़ नज़र आने लगता है।

हर वय के लोगों को साथ लेकर चलने वाली “अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत” पिछले ५० वर्षों से भारत भर के गाँव-शहर में जाकर ग्राहकों के अधिकारों व जागरण की बात कर रही है। यह संगठन न सिर्फ़ संस्कृति और संस्कारों की रक्षा के प्रति कटिबद्ध है बल्कि हमें फाँसने के लिए क़दम-क़दम पर बिछे हुए अनेक प्रकार के भ्रमजालों के प्रति भी सचेत करता है। पुस्तक “वैचारिकी” एक अलार्म है जो अपने कर्तव्यों और ज़िम्मेदारियों के प्रति उदासीन और सोये लोगों को जगाती है। यह एक आंदोलन है, जिसकी शुरुआत हमें अपने ही घर से करनी है।

इस पुस्तक में समाज के उन विषयों की ओर ध्यान आकृष्ट किया गया है, जो राष्ट्र हित के बिल्कुल प्रतिकूल हैं। मसलन मिलावटी खाद्य पदार्थ, महँगी होती शैक्षणिक पुस्तकें, जमाखोरी, साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट, विज्ञापन का जाल, प्लास्टिक का ज़हर, ओ.टी.टी. के दुष्प्रभाव और ऑनलाइन खरीदारी के जोख़िम। इसके साथ ही कुछ विषयों के प्रति जागरूक भी किया गया है। जैसे – महिला जागरण, संतुलित जीवन शैली, सात्विक भोजन, ग्राहक अधिकार व उनसे संबंधित कानून, हॉलमार्क, समाजोत्थान में युवाओं की भूमिका, सांगठनिक दक्षता के गुण, पर्यावरण संरक्षण, मृदा संरक्षण, कचरे का निष्पादन, पेसा अधिनियम -१९९६, सनातन, योग-साधना, ग्राहक और व्यवसायी का मैत्रीभाव तथा युवा शक्ति : राष्ट्र शक्ति।

हालांकि कुछ विषय और शीर्षकों का दोहराव भी हो गया है जो पुस्तक को बोझिल बनाते हैं।
समाज व राष्ट्र हितानुकूल प्रकाशित इस पुस्तक “वैचारिकी” के लिए सभी लेखकों के साथ-साथ संपादकों को भी आत्मिक धन्यवाद। विशेषतः पूर्वी सिंहभूम, झारखण्ड प्रान्त को ह्रदय से आभार। पाठकों से अनुरोध है कि इस पुस्तक को अवश्य ही पढ़ें, अपने बच्चों को पढ़ायें। तथा अपने पड़ोसियों और परिचितों को भी पढ़ने की सलाह दें।

‘अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के पूर्वी सिंहभूम, झारखण्ड प्रान्त’ के द्वारा इस १२८ पृष्ठ की यह पुस्तक जिसका मूल्य ₹२५० है, ‘उत्कर्ष प्रकाशन, मेरठ’ से प्रकाशित हुई है। जिसमें ४३ रचनाकारों की कुल ५० रचनाएँ शामिल की गई हैं। इनमें से ३३ गद्य व १७ पद्य हैं। इस पुस्तक में प्रान्त उपाध्यक्ष ऐजिंल उपाध्याय जी, प्रान्त पर्यावरण प्रमुख डॉ. अनिता शर्मा जी व पर्यावरण आयाम सह-प्रमुख कुमार अमलेंदु जी का संपादन है। राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनकर सबनीस जी और क्षेत्रीय संगठन मंत्री शिवाजी क्रांति के शुभकामना संदेश हैं।

यह पुस्तक पठनीय भी है और संग्रहणीय भी।आज के समय को देखा जाए तो बाजारवाद बुरी तरह से सभी पर हावी है और छात्र-छात्राएं भी इसके चपेट में हैं ।
ऐसे में हर विद्यालय के पुस्तकालय में भी “वैचारिकी” पुस्तक की एक प्रति हो तो अच्छा रहेगा।
:–डॉली परिहार
प्रचार आयाम सदस्य
झारखण्ड प्रान्त
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत।

