लेखक: इंद्र यादव
ठाणे की दहीहंडी इस वर्ष भी अपनी पारंपरिक भव्यता और सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाई गई, जहां बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सुनील शेट्टी की उपस्थिति ने समारोह में चार चांद लगा दिए। महाराष्ट्र के लोकप्रिय त्योहार जन्माष्टमी के अवसर पर दहीहंडी का आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह युवाओं के साहस और एकजुटता का प्रदर्शन भी करता है। इस बार ठाणे शहर में आयोजित इस महोत्सव ने खूब सुर्खियां बटोरीं, क्योंकि यहां फिल्मी सितारे की मौजूदगी ने गोविंदाओं और दर्शकों का उत्साह दोगुना कर दिया।
मुंबई:ठाणे शहर में दहीहंडी उत्सव इस बार भी धूमधाम से मनाया गया। प्रताप सरनाईक फाउंडेशन और संस्कृति युवा प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी बतौर मेहमान शामिल हुए। युवासेना के कार्याध्यक्ष पूर्वेश सरनाईक ने उनका स्वागत और सम्मान किया।
ठाणे की दहीहंडी में सुनील शेट्टी का खास अंदाज
सुनील शेट्टी को देखने के लिए गोविंदाओं और लोगों में खासा उत्साह रहा। कार्यक्रम का सबसे यादगार पल तब आया, जब उन्होंने मंच से मराठी में लोगों से बातचीत की और सभी को दहीहंडी की शुभकामनाएं दीं। उनके मराठी अंदाज पर पंडाल तालियों और सीटियों से गूंज उठा।
उत्सव के दौरान गोविंदाओं ने पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ी। सुनील शेट्टी की मौजूदगी और उनके मिलनसार अंदाज ने ठाणे की दहीहंडी को और खास बना दिया।
दहीहंडी की परंपरा और सुनील शेट्टी का जुड़ाव
दहीहंडी जिसे गुजरात और महाराष्ट्र में कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया जाता है, भगवान कृष्ण के माखन चुराने की लीला का प्रतीक है। इस उत्सव में युवा गोविंदा मंडल बनाकर ऊंचाई पर लटकी मटकी को फोड़ते हैं। यह आयोजन शारीरिक बल, संतुलन और टीम वर्क का अद्भुत संगम है। ठाणे में प्रताप सरनाईक फाउंडेशन वर्षों से इस परंपरा को जीवंत रखे हुए है। इस वर्ष के आयोजन में संस्कृति युवा प्रतिष्ठान की सहभागिता ने इसे और वृहद स्तर प्रदान किया।
सुनील शेट्टी, जिन्हें प्यार से ‘अन्ना’ कहा जाता है, लंबे समय से फिटनेस और अनुशासन के प्रतीक रहे हैं। उनकी फिल्मों ने एक्शन और देशभक्ति के जज्बे को दर्शाया है। ऐसे में उनका दहीहंडी जैसे साहसिक उत्सव में शामिल होना स्वाभाविक ही लगता है। उन्होंने मंच से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन हमारी संस्कृति को जीवित रखते हैं और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं। उनका मराठी में भाषण देना स्थानीय जनमानस के प्रति उनके सम्मान और लगाव को दर्शाता है।
पूर्वेश सरनाईक और युवासेना की भूमिका
युवासेना के कार्याध्यक्ष पूर्वेश सरनाईक ने इस आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में युवासेना के कार्यकर्ताओं ने व्यवस्था संभाली और गोविंदाओं का हौसला बढ़ाया। पूर्वेश सरनाईक ने सुनील शेट्टी का स्वागत करते हुए उन्हें दहीहंडी की पारंपरिक पगड़ी और शॉल भेंट की। उन्होंने कहा कि सुनील शेट्टी जैसे कलाकार का यहां आना ठाणे के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।
कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल के साथ-साथ स्वयंसेवक भी भीड़ को नियंत्रित करने में लगे रहे। गोविंदा मंडलों के लिए पुरस्कार राशि भी रखी गई थी, जिससे प्रतिस्पर्धा रोमांचक रही। कई मंडलों ने हैरतअंगेज पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ी और इनाम अपने नाम किया।
अभिनेता सुनील शेट्टी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी इस उत्सव की तस्वीरें साझा कीं और ठाणे वासियों को जन्माष्टमी और दहीहंडी की बधाई दी। उनकी पोस्ट पर लाखों लाइक्स और कमेंट्स आए, जिससे इस उत्सव की चर्चा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी खूब हुई। आप दही हंडी के इतिहास और महत्व के बारे में अधिक पढ़ सकते हैं।
कुल मिलाकर, ठाणे की दहीहंडी इस बार सितारों की चमक और पारंपरिक जोश का अद्भुत मिश्रण रही। सुनील शेट्टी की सादगी और मराठी प्रेम ने उन्हें आम जनमानस का चहेता बना दिया। ऐसे आयोजन न केवल मनोरंजन प्रदान करते हैं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का कार्य भी करते हैं। अगले वर्ष भी इसी उत्साह और भव्यता के साथ दहीहंडी मनाए जाने की उम्मीद है।

