टाटानगर : रेलवे की 100 एकड़ जमीन का हो गया अतिक्रमण, पर नहीं हुई एक भी रेलवे कर्मचारी पर कार्रवाई
*भाग 01*
*देवानंद सिंह*
पिछले दिनों जमशेदपुर में रेलवे जमीन के अतिक्रमण के मुद्दे ने सभी को चौंकाया। कई बार अतिक्रमण का डंडा भी चला, कई दुकानें जमीदोंज भी हुईं, किंतु ना तो रेलवे के आला अधिकारियों और ना ही जिले के पदाधिकरियों ने यह जानने का यह प्रयास किया कि अतिक्रमण कैसे होता है। नोटिस कैसे भेजे जाते हैं और नोटिस की आड़ में किस तरह से अंडर टेबल का खेल चलता है ? यह खेल करने वाले कौन लोग हैं ? जाहिर है ये रेलवे के पदाधिकारी नहीं हैं, इनका मातृ विभाग कुछ और है। ये एक दशक से जमशेदपुर में जमे हुए हैं और इनका वसूली अभियान भी निरंतर जारी है।
आश्चर्य की बात यह है कि टाटानगर में रेलवे की लगभग 100 एकड़ जमीन का अतिक्रमण हो गया, लेकिन एक भी रेलवे कर्मचारी पर कार्रवाई नहीं हुई।
चौंकाने वाली बात अब सामने आने लगी है कि रेलवे ने कर्मचारियों की कमी की वजह से दूसरे विभाग से कर्मचारियों को लोन पर लिया और यह पदाधिकारी पिछले एक दशक से जमशेदपुर में जमे हैं।
सूत्रों की मानें तो इनकी देखरेख में ही जमीन के अतिक्रमण के गोरखधंधे का खेल निरंतर एक दशक से जारी है। किस तरह ये पदाधिकारी पहले जमीन का अतिक्रमण करवाते हैं, फिर नोटिस भेजते हैं और अंत में सुविधा शुल्क के आधार पर सुविधा दी जाती है, जिन्होंने सुविधा शुल्क देने में आनाकानी की तो फिर उनकी खैर नहीं।
*कौन-कौन लोग हैं इसमें शामिल और किसने कहा जमशेदपुर रेलवे के पदाधिकारी बेलगाम हो गए हैं… पढ़े अगली कड़ी में*

