टाटा लीज नवीनीकरण के नाम पर मूलवासी अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: झारखंड मूलवासी अधिकार मंच
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर।टाटा कंपनी के लीज नवीनीकरण को लेकर झारखंड मूलवासी अधिकार मंच ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम को ज्ञापन सौंपा। मंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक मूलवासी, रैयत और विस्थापितों के संवैधानिक, वैधानिक और ऐतिहासिक अधिकारों को सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना अन्यायपूर्ण और अवैध होगा।
मंच के प्रतिनिधि एवं मुख्य संयोजक हरमोहन महतो ने कहा कि प्रशासन लंबे समय से मूलवासी समाज की जायज मांगों को नजरअंदाज करता आ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो 20 फरवरी को बिष्टुपुर पोस्टल पार्क के सामने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
हरमोहन महतो ने जमशेदपुर के कदमा स्थित जगन्नाथ मंदिर की भूमि का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिस जमीन पर 26 फरवरी को राष्ट्रपति महोदया द्वारा भूमि पूजन कार्यक्रम प्रस्तावित है, वह भूमि वर्ष 1908 के मूल खतियान में हेम महतो के नाम दर्ज है। बाद में गलत सर्वे कराकर इस भूमि को सरकारी घोषित कर दिया गया, जो ऐतिहासिक अभिलेखों और मूल खतियानधारी रैयतों के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक भूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि जमशेदपुर के कई इलाकों में मूल खतियानी जमीनें खाली पड़ी होने के बावजूद लीज के नाम पर उनका बंदरबांट किया गया है। मंच ने मांग की कि ऐसी सभी जमीनों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मूल खतियानधारी रैयतों को उनका वैधानिक अधिकार लौटाया जाए।
मंच ने यह भी दोहराया कि पेसा कानून, सीएनटी एक्ट और संविधान की पाँचवीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत ग्रामसभा की सहमति और रैयतों की भागीदारी के बिना लिया गया कोई भी निर्णय अवैध माना जाएगा। इन कानूनों की अनदेखी कर किया गया लीज नवीनीकरण मूलवासी समाज के साथ अन्याय होगा।
झारखंड मूलवासी अधिकार मंच ने अपनी प्रमुख मांगों में टाटा कंपनी के लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने, 1908 सहित सभी मूल खतियानों के आधार पर विवादित जमीनों की जांच कराने, गलत सर्वे के जरिए सरकारी घोषित की गई जमीनों को मूल खतियानधारियों को लौटाने तथा विस्थापितों को पुनर्वास, रोजगार और आजीविका का अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की।
अंत में मंच ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इस दौरान संयुक्त नेतृत्व के तहत हरमोहन महतो, अशोक गोप, दीपक रंजीत, प्रहलाद गोप, तपन पंडा, सुनील हेंब्रम, सारथी दास, उत्तम गौड़, मनोज बोदरा, साघन पंडा, अनिता रजक, उत्पल महतो, भारती रजक, राम सिंह भुमिज, रामचन्द्र महतो, गोर हेंब्रम, कुसुम देवी, महन सिंह भुमिज सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

