

भरत तिवारी एनकाउंटर से शुरू हुआ विवाद, कुंदन कृष्णन की संपत्ति पर सुधाकर सिंह ने उठाए सवाल। पांच करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस से गरमाई बिहार की सियासत, सांसद ने संपत्तियों की स्वतंत्र जांच की मांग की।
पटना। भरत भूषण तिवारी कथित फर्जी एनकाउंटर को लेकर शुरू हुआ बक्सर के RJD सांसद सुधाकर सिंह और वरिष्ठ IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन के बीच विवाद अब संपत्ति और पुलिस की जवाबदेही तक पहुंच गया है। कुंदन कृष्णन की ओर से सुधाकर सिंह को पांच करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजे जाने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है।
कुंदन कृष्णन की संपत्ति और एनकाउंटर विवाद
17 जून 2026 को भोजपुर के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की पुलिस कार्रवाई में मौत हुई थी। पुलिस ने इसे मुठभेड़ बताया, जबकि परिजनों और स्थानीय लोगों ने इसे कथित फर्जी एनकाउंटर करार देते हुए सवाल उठाए। सांसद सुधाकर सिंह ने इस मामले में तत्कालीन STF प्रमुख कुंदन कृष्णन की भूमिका और वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए थे।
इसके बाद अक्टूबर में कुंदन कृष्णन की ओर से पांच करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजकर सार्वजनिक माफी की मांग की गई। सुधाकर सिंह ने इसे सवाल पूछने के लोकतांत्रिक अधिकार से जोड़ते हुए पीछे हटने से इनकार किया।
सांसद सुधाकर सिंह द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप
3 नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद ने कुंदन कृष्णन और उनके परिवार की संपत्तियों को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि परिवार की संपत्ति घोषणा में 100 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियों का उल्लेख है। कैमूर के भगवानपुर में करीब 16 एकड़ 88 डिसमिल जमीन, पटना के ट्रांसपोर्ट नगर में जमीन, धनौत की संपत्ति और विभिन्न भूमि लेन-देन में कथित विसंगतियों का हवाला देते हुए उन्होंने स्वतंत्र जांच की मांग की।
इस विवाद पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सचिवालय ने भी संज्ञान लिया है। 27 अक्टूबर को गृह विभाग के प्रधान सचिव को पत्र भेजकर मामले की छानबीन और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
बिहार की राजनीति में पुलिस जवाबदेही पर बहस
हालांकि, सांसद द्वारा लगाए गए संपत्ति संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। विवाद ने बिहार में पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही, जनप्रतिनिधियों के अधिकार और सरकारी पदों पर बैठे लोगों की संपत्ति में पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
अब मुख्य सवाल यह है कि क्या इन गंभीर आरोपों का जवाब पुख्ता दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच के जरिए मिल पाएगा, या फिर यह पूरा मामला केवल एक लंबी कानूनी लड़ाई और सियासी बयानबाजी में ही उलझ कर रह जाएगा। प्रदेश की जनता और राजनीतिक गलियारों में इस हाई-प्रोफाइल विवाद की गूंज लगातार बनी हुई है, जिससे आने वाले दिनों में और राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने की पूरी संभावना है।

