Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » राजपूतों के राजनीतिक भरोसे पर रूढ़ी ने उठाए सवाल, भाजपा में भी हलचल
    Breaking News Headlines खबरें राज्य से पटना बिहार बेगूसराय मुंगेर मुजफ्फरपुर राजनीति समस्तीपुर

    राजपूतों के राजनीतिक भरोसे पर रूढ़ी ने उठाए सवाल, भाजपा में भी हलचल

    Devanand SinghBy Devanand SinghNovember 4, 2026No Comments3 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    राजपूतों के राजनीतिक भरोसे
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    बिहार में राजपूतों के राजनीतिक भरोसे पर सारण से भाजपा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूढ़ी ने छपरा में बड़ा बयान दिया है। छपरा में दिशा की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि बिहार में राजपूतों का भरोसा किसी एक राजपूत नेता पर नहीं है। जिन राजनीतिक दलों को समाज ने समर्थन दिया, उन्हीं के भीतर आज समाज का एक वर्ग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राजपूत गद्दार नहीं होते, उनके इतिहास और बलिदान को समझने की जरूरत है। रूढ़ी के इस बयान को भाजपा के भीतर भी सामाजिक सम्मान और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर उठते सवालों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    बिहार में राजपूतों के राजनीतिक भरोसे पर उठे सवाल

    सारण, सिवान, गोपालगंज, चंपारण और महाराजगंज जैसे प्रमुख क्षेत्रों में राजपूत समाज का पारंपरिक राजनीतिक प्रभाव रहा है। इसके बावजूद मंत्री पद, संगठन में जिम्मेदारी और निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त भागीदारी को लेकर असंतोष की चर्चा होती रही है। बिहार विधानसभा में 32 राजपूत विधायकों और लोकसभा की छह सीटों पर राजपूत सांसदों की मौजूदगी के दावों के बीच समाज की वास्तविक राजनीतिक भागीदारी का सवाल भी उठ रहा है। सारण और तिरहुत विधान परिषद चुनावों में जदयू प्रत्याशियों की हार तथा प्रभुनाथ सिंह और पवन सिंह जैसे चेहरों की राजनीतिक सक्रियता ने इस विमर्श को और चर्चा में ला दिया है।

    रूढ़ी का यह बयान किसी एक दल के खिलाफ सीधी राजनीतिक घोषणा भले न हो, लेकिन इसने बिहार की राजनीति में राजपूत समाज के सम्मान, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक भरोसे की बहस को तेज कर दिया है। अब राजनीतिक दलों के सामने यह बड़ी चुनौती है कि चुनाव के समय मिलने वाले समर्थन को चुनाव के बाद भी सम्मान और हिस्सेदारी में कैसे बदलते हैं। बिहार की राजनीति में इस वर्ग की नाराजगी को दूर करना सभी दलों के लिए एक बड़ी प्राथमिकता बन गया है।

    राजनीतिक दलों के लिए सम्मान और हिस्सेदारी की चुनौती

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक राजनीतिक दल समाज के इतिहास और बलिदान का सही सम्मान नहीं करेंगे, तब तक विश्वास का यह संकट बना रहेगा। राजीव प्रताप रूढ़ी के इस बयान ने पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह नई हलचल पैदा कर दी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि विभिन्न राजनीतिक दल इस असंतोष को दूर करने के लिए क्या कदम उठाते हैं। बिहार की सियासत में जातियों का समीकरण हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है और ऐसे में राजपूत समाज की नाराजगी किसी भी दल के लिए भारी पड़ सकती है।

    छपरा की इस घटना के बाद से ही राज्य के राजनीतिक गलियारों में बैठकों और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। स्थानीय नेताओं से लेकर बड़े दिग्गजों तक इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। बिहार की राजनीति में इस समय यह सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या आने वाले चुनावों में इस वर्ग का रुख बदलेगा या राजनीतिक दल इन्हें मनाने में कामयाब होंगे।

    बिहार समाचार भाजपा हलचल राजनीतिक प्रतिनिधित्व राजपूत राजनीति राजीव प्रताप रूढ़ी
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleभरत तिवारी एनकाउंटर से शुरू हुआ विवाद, कुंदन कृष्णन की संपत्ति पर सुधाकर सिंह ने उठाए सवाल
    Next Article MLC चुनाव में हार से NDA में घमासान, JDU को BJP में भीतरघात का शक

    Related Posts

    छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए उतरेगी एसडीआरएफ, असामाजिक तत्वों पर रहेगी नजर

    November 5, 2026

    छौड़ाही प्रखंड प्रमुख मनोज यादव का निर्वाचन रद्द,पद रिक्त

    November 5, 2026

    अतरुआ चौक पर जलजमाव से नाराज ग्रामीणों ने चार घंटे तक किया सड़क जाम, सीओ के आश्वासन पर समाप्त हुआ धरना

    November 5, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए उतरेगी एसडीआरएफ, असामाजिक तत्वों पर रहेगी नजर

    छौड़ाही प्रखंड प्रमुख मनोज यादव का निर्वाचन रद्द,पद रिक्त

    अतरुआ चौक पर जलजमाव से नाराज ग्रामीणों ने चार घंटे तक किया सड़क जाम, सीओ के आश्वासन पर समाप्त हुआ धरना

    पेंशनर समाज के सचिव पर जानलेवा हमला करने वाले आरोपी गिरफ्तार

    बखरी में गूंजा युवाओं का हुंकार : “लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ”

    विधायक अभिषेक आनंद ने किया स्वास्थ्य उपकेंद्र बरियारपुर पूर्वी का उद्घाटन

    विश्व में एकाकी अध्यात्म देश भारत है, जहां पर परिक्रमा के पग पग पर अश्वमेध यज्ञ — स्वामी चिदात्मन जी।

    संत जूड्स विद्यालय में दीपावली एवं छठ पूजा का भव्य सांस्कृतिक आयोजन

    सामूहिक खरीद-बिक्री से किसानों की बढ़ेगी ताकत, उपज का मिलेगा बेहतर मूल्य

    लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ अभियान के तहत भाजपा जमशेदपुर महानगर की विशाल जनजागरण पदयात्रा, दिग्गज नेत

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.