
लेखक: नितेश सिंह राजपूत
बखरी-बेगूसराय : दीपावली के साथ ही लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की तैयारी बखरी में जोरों पर है। प्रखंड क्षेत्र के सभी प्रमुख घाटों पर साफ-सफाई और रंग-रोगन का कार्य तेजी से चल रहा है। इस महापर्व को लेकर स्थानीय लोगों और प्रशासन में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। सभी घाटों को सुंदर ढंग से सजाया जा रहा है ताकि व्रतियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
बखरी में छठ घाटों की तैयारी तेज और पुस्तकालय तालाब की सजावट
बखरी नगर परिषद द्वारा श्री विश्वबंधु पुस्तकालय के समीप स्थित तालाब की विशेष रूप से साफ-सफाई और साज-सज्जा कराई गई है। आकर्षक रंग-रोगन के बाद यह तालाब लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया है। इस तालाब की खूबसूरती देखने लायक है और यहां बड़ी संख्या में लोग रोजाना पहुंच रहे हैं। नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि महापर्व के दौरान सुरक्षा और स्वच्छता के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को कोई परेशानी न हो।
बिहार की पहचान और करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक यह महापर्व इस वर्ष 13 नवंबर से 16 नवंबर तक मनाया जाएगा। चार दिनों तक व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना करेंगे। इस दौरान व्रतियों द्वारा उपवास रखा जाता है और कठिन साधना की जाती है।
छठ पूजा की महिमा और परंपरा
छठ एक ऐसा अनूठा पर्व है जिसमें डूबते और उगते दोनों सूर्य की पूजा होती है। यही परंपरा इसे अन्य पर्वों से अलग बनाती है। इस दौरान घाटों पर आस्था का जनसैलाब उमड़ेगा। दूर-दूर से लोग अपने परिवार के साथ इन घाटों पर पहुंचते हैं और अंचल की संस्कृति का अनूठा दर्शन करते हैं।
प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी घाटों पर पर्याप्त रोशनी, बैरिकेडिंग और सुरक्षा बल तैनात रहें। स्वयंसेवी संस्थाएं भी इस कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं ताकि पर्व शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से संपन्न हो सके।
छठ पूजा की तिथियां और कार्यक्रम
इस वर्ष महापर्व के दौरान विभिन्न तिथियों पर होने वाले अनुष्ठान इस प्रकार हैं:
- 13 नवंबर, शुक्रवार – नहाय-खाय से शुरुआत
- 14 नवंबर, शनिवार – खरना
- 15 नवंबर, रविवार – संध्या अर्घ्य
- 16 नवंबर, सोमवार – उषा अर्घ्य के साथ व्रत का पारण और महापर्व का समापन हो जाएगा।
इन चार दिनों में हर घर में भक्तिमय माहौल रहता है। ठेकुआ और अन्य प्रसाद की खुशबू से पूरा वातावरण महक उठता है। सभी लोग इस महापर्व को मनाने के लिए अपने पैतृक आवास लौट रहे हैं।

