मौत के साये में पठन पाठन करने को मजबूर है उत्क्रमित उच्च विद्यालय डोमजूरी के छात्र
राष्ट्र संवाद संवाददाता
पोटका। पोटका प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित उच्च विद्यालय डोमजूरी विद्यालय का भवन देखने से खंडहर से कम नहीं लगता। ऐसा प्रतीत होता है कि इस विद्यालय को भवन विभाग के द्वारा अनुपयोगी घोषित किया गया हो। लेकिन इस विद्यालय के जर्जर भवन में बच्चों का पठन पाठन कराया जाता है जो कल का भविष्य हैं।
इस विद्यालय में कक्षा एक से दस तक की पढ़ाई होती है। विद्यालय में नामांकित 312 बच्चे है। विद्यालय के सभी कमरे इतनी जर्जर हो चुकी है कि शिक्षक से लेकर छात्र तक को हर समय भय बना रहता है। छत से सीमेंट का पपरा टूटकर गिरता रहता है। अबतक छह से अधिक बार क्लास संचालन के समय पपरा टूटकर गिर चुका है। जिससे बच्चों को चोट भी लगी है। भवन जर्जर होने के कारण वर्षा होने पर पूरा छत सीपेज होने पर पानी टपकने लगता है।

सुरक्षा को देखते हुए कई वर्गों के छात्रों को एक साथ बैठाया जाता है। ताकि बच्चे डरे नहीं। कोई अनहोनी घटना न हो इसलिए विद्यालय के चार कमरा को स्थाई रूप से बंद कर दिया गया है। तथा छह से आठ वर्ग के छात्रा छात्राओं को विद्यालय से एक किलोमीटर दूर उच्च विद्यालय के भवन में स्थानांतरित किया गया है। मध्यान भोजन के लिए बच्चे पुनः 1.40 बजे पुराने विद्यालय में आते है। शिक्षक भी पढ़ाने के लिए एक किलोमीटर में दौड़ लगाते रहते है। ग्रामीण बताते है कि भवन जर्जर होने के कारण सांप भी निकलते रहता है। भवन पर बड़े बड़े घास उग आये है। भवन के लिए कई बार आवाज बुलंद किया गया परंतु नतीजा कुछ नहीं निकला। डोमजूरी पंचायत के मुखिया अनीता मुर्मू, जिप सदस्य हिरण्य मय दास ने उप विकास आयुक्त को भवन निर्माण के लिए एक आवेदन देकर गुहार लगाया है। उप विकास आयुक्त ने भी अविलंब ही इसे पुर करने का आश्वासन दिया है।

