शंकराचार्य विवाद और 2027 की बिसात: RSS का ‘योगी’ प्लान तैयार!
राष्ट्र संवाद
मुंबई (इंद्र यादव) उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज है। कानपुर में संघ (RSS) और भाजपा की हाई-प्रोफाइल बैठक ने साफ कर दिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भगवा खेमा किसी भी तरह के ‘डैमेज’ को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। इस बैठक का सबसे बड़ा सार यह है—विवादों को खत्म करो और हिंदुत्व की एकता को बचाओ।
शंकराचार्य विवाद: सरकार के लिए ‘निगेटिविटी’ का रेड सिग्नल
बैठक में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और सरकार के बीच उपजे हालिया विवादों पर लंबी चर्चा हुई। संघ का मानना है कि इस विवाद से ‘सनातन एकता’ की मुहिम कमजोर हो रही है।
RSS का स्टैंड: संघ ने दो टूक कहा है कि शंकराचार्य मामले से जो नकारात्मकता फैली है, उसे योगी सरकार हर हाल में काउंटर करे।
मकसद: जनता के बीच यह संदेश जाना चाहिए कि भाजपा सरकार संतों और सनातन धर्म के साथ मजबूती से खड़ी है।
गंभीरता: क्योंकि यह मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है, इसलिए इसे हल्के में लेना चुनावी गणित बिगाड़ सकता है।
2027 की कमान, सिर्फ योगी के हाथ
कानपुर की इस बैठक ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है जो यूपी नेतृत्व को लेकर लगाई जा रही थीं। संघ ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि.
योगी ही चेहरा: 2027 के चुनावों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही पार्टी का सबसे बड़ा और प्रभावी चेहरा होंगे।
अनुशासनहीनता पर वार: लोकसभा चुनाव के दौरान कानपुर-बुंदेलखंड में हुए नुकसान और स्थानीय नेताओं की आपसी खींचतान को जल्द खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं।
संगठनात्मक बदलाव: आने वाले दिनों में यूपी भाजपा के संगठन में बड़े फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।
चुनौतियों का चक्रव्यूह: UGC नियम और असंतोष
सिर्फ धार्मिक विवाद ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक मोर्चे पर भी सरकार को सतर्क रहने को कहा गया है। बैठक में UGC के नए नियमों से युवाओं और शिक्षकों में बढ़ रहे असंतोष का मुद्दा भी उठा। संघ का मानना है कि चुनावी साल की ओर बढ़ते हुए ऐसे जमीनी मुद्दों पर नाराजगी भाजपा की छवि को नुकसान पहुँचा सकती है।
“सियासी गलियारों में चर्चा है कि मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ की बार-बार हो रही मुलाकातें इस बात का प्रमाण हैं कि RSS और सरकार के बीच तालमेल अब पहले से कहीं ज्यादा गहरा है।”
नतीजा: अब आक्रामक होगी भाजपा
संघ के इस ‘ग्रीन सिग्नल’ के बाद अब यूपी सरकार और भाजपा संगठन दोनों ही मोड में नजर आएंगे!
विपक्षी नैरेटिव और निगेटिव कैंपेनिंग का सख्ती से जवाब दिया जाएगा।
धार्मिक गुरुओं के साथ संवाद बढ़ाकर भ्रम की स्थिति दूर की जाएगी।
हिंदुत्व और विकास के कॉम्बो को फिर से फ्रंट पर रखा जाएगा।

