खुद को थोड़ा बचाया कर
खुद को थोड़ा बचाया कर ,
जैसे कोई बुढ़िया बचाती हो सिक्के ,
आंचल की गांठ में।
बच्चा छुपाता हो पसंदीदा खिलौना ,
युवा अपने मोबाइल में छुपाता हो
कुछ प्रेमिल तस्वीरें ।
माई रखती थी छुपा कर नोट की गड्डी, चावल के डब्बे में ,
बुधिया हर मुसीबत को झेल बचाये रखता है ,
अपने बाप दादा पुरखे की जमीन ।
सोमवारी ने भी बचा रखा है ,
सास से मिली मुंह दिखाई के कंगन ।
ठीक ऐसे ही
खुद को थोड़ा बचाया कर।
सबसे खुद को छुपाया कर।।
:- डॉ कल्याणी कबीर

