Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » संचार युग में हिंदी भाषा की बढ़ती प्रतिष्ठा
    धर्म मेहमान का पन्ना राष्ट्रीय शिक्षा संपादकीय साहित्य

    संचार युग में हिंदी भाषा की बढ़ती प्रतिष्ठा

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 14, 2026No Comments5 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    हिंदी भाषा की बढ़ती प्रतिष्ठा
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    लेखक: प्रमोद दीक्षित मलय

    संचार युग में हिंदी भाषा की बढ़ती प्रतिष्ठा एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। आज हिंदी न केवल भारत बल्कि विश्व पटल पर अपनी पहचान मजबूत कर रही है।

    भाषा अभिव्यक्ति का सहज माध्यम है। भाषा व्यक्तियों, समुदायों एवं देशों के बीच परस्पर संपर्क-संवाद का सुगम सेतु है। भाषा व्यक्ति की पहचान है तो राष्ट्र का गर्व, गौरव और अस्मिता भी। बिन भाषा के व्यक्ति मूक है और राष्ट्र गूंगा है। भाषा है तो व्यापार है, जीवन के तमाम व्यवहार हैं और आदर-सत्कार भी। भाषा संबंध जोड़ती और रिश्ते गढ़ती है। भाषा निर्झर निर्मल नीर है तो हृदय की वेदना, कसक, पीर भी। भाषा है तो जीवन है और जीवन के इंद्रधनुषी रंग भी। खुशी की बात है कि भारत भाषाओं के मामले में समृद्ध है। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम अनेकानेक भाषाएं अपनी रचनात्मकता से मां भारती का अर्चन-स्तवन कर रही हैं। यहां किसी भाषा का किसी से बैर भाव नहीं, वह परस्पर सखी-सहेली हैं। हिंदी भले ही संपूर्ण भारत में न बोली जाती हो पर समझी अवश्य जाती है। हिंदी राष्ट्रभाषा भले ही न हो किंतु राजकाज की भाषा है। 10 राज्यों ने हिंदी को आधिकारिक राजभाषा का दर्जा दिया है जिनमें बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली आदि राज्य हैं। गुजरात, पश्चिम बंगाल और मिजोरम राज्यों में हिंदी द्वितीय राजाभाषा के रूप में समादृत है। वैश्वीकरण के दौर में हिंदी विश्व भाषा बनने की ओर अग्रसर हो प्रतिष्ठा प्राप्त कर रही है। एक शोध के अनुसार चीनी (मंडारिन) और अंग्रेजी के बाद हिंदी ही सर्वाधिक बोले जाने वाली भाषा है। हिंदी के प्रचार-प्रसार में 150 से अधिक संस्थाएं देश-विदेश में सक्रिय एवं साधनारत हैं। इस शृंखला में हिंदी दिवस के महत्वपूर्ण आयोजन का स्मरण स्वाभाविक है जिसके कारण 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाया जाना आरम्भ हुआ है। देश के अंदर हिंदी के प्रचार एवं प्रसार हेतु जन जागरूकता उत्पन्न करने तथा राष्ट्र भाषा के रूप में हिंदी को बढ़ावा देने हेतु राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा की पहल एवं सुझाव पर सर्वप्रथम 14 सितम्बर, 1953 को हिंदी दिवस का आयोजन किया गया था।

    हिंदी भाषा की बढ़ती प्रतिष्ठा : हिंदी दिवस का इतिहास

    प्रश्न उठता है कि हिंदी दिवस 14 सितम्बर को ही क्यों मनाया जाता है। उल्लेखनीय है कि 14 सितंबर, 1949 को अनुच्छेद 343 (1) अंतर्गत हिंदी भाषा को संविधान सभा द्वारा बहस के बाद देवनागरी लिपि के साथ भारत की आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया था। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की स्मृति हेतु प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। सर्वप्रथम 14 सितंबर, 1953 को हिंदी दिवस मनाया गया।

    वैश्विक मंच पर हिंदी की धमक

    आज 150 से अधिक देशों में भारतवंशी हैं, जहां हिंदी बोली जा रही है। 50 से अधिक देशों के 150 से अधिक विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ाई जा रही है। विश्व आर्थिक मंच की एक दशक पूर्व गणनानुसार हिंदी 10 सर्वाधिक शक्तिशाली भाषाओं में से एक भाषा है। हिंदी के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का ही परिणाम है कि 2019 में आबू धाबी ने हिंदी को न्यायालय की तीसरी भाषा के रूप में मान्यता दी है तथा ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने बहुत सारे हिंदी शब्दों को अपने नवीन संस्करण में स्थान दिया है जो हिंदी के बढ़ते प्रभाव का संकेत है। 1977 में विदेश मंत्री तथा 2002 में प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी जी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण देकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया था। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अपने विदेश प्रवास में विभिन्न संसदों, सरकारी कार्यक्रमों तथा भारतीय समुदाय को हिंदी में ही सम्बोधित करते हैं। उल्लेखनीय है कि विदेश में बसे भारतीय मूल के दो करोड़ भारतवंशी परस्पर हिंदी माध्यम से कार्य संपादित करते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी, चीनी, स्पेनिश और अरबी को आधिकारिक दर्जा प्राप्त है, बावजूद इसके संयुक्त राष्ट्र कार्यालय द्वारा प्रति सप्ताह महत्वपूर्ण सूचनाओं का एक पत्रक हिंदी में प्रकाशित किया जाता हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया देखें।

    डिजिटल युग और हिंदी का भविष्य

    इंटरनेट के युग परस्पर संवाद के लिए हिंदी एक सहज माध्यम बनी है। कहा जा रहा है की तेजी से बदलते इस संचार युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में केवल 8-10 भाषाएं ही बचेंगी जिसमें हिंदी प्रमुख होगी। आज हिंदी की आवश्यकता संपूर्ण विश्व महसूस कर रहा है क्योंकि भारत एक बहुत बड़ी जनसंख्या वाला देश है। इसलिए पूरी दुनिया की बहुराष्ट्रीय कंपनियां एवं व्यापारिक संस्थाएं भारत को एक बड़े बाजार के रूप में देखते हुए अपने कर्मचारियों को हिंदी सीखने को प्रेरित एवं प्रशिक्षित कर रही हैं, साथ ही विज्ञापन की भाषा भी हिंदी दिखाई पड़ने लगी है। हिंदी दिनोंदिन समृद्ध हो रही है क्योंकि विभिन्न भाषाओं के जरूरी शब्द हिंदी उदार मन से न केवल स्वीकार कर रही है बल्कि दैनंदिन कार्य-व्यवहार में उपयोग भी कर रही है। आकाशवाणी केन्दों एवं टीवी चैनलों के विविध मनोरंजक कार्यक्रमों द्वारा विश्व के अनेक देशों तक हिंदी पहुंच और पसन्द की जा रही है। हिंदी फिल्में भी विदेश में देखी-सराही जा रही हैं। फिजी, गुयाना, सूरीनाम, टोबैगो, ट्रिनिडाड और अरब अमीरात में हिंदी को आधिकारिक रूप से अल्पसंख्यक भाषा का दर्जा प्राप्त है। भारत के अलावा पूरे विश्व में 25 से अधिक पत्र-पत्रिकाएं हिंदी में निकल रही हैं और हिंदी में रेडियो कार्यक्रम संचालित होते हैं।

    अंत में, हमें हिंदी भाषा की बढ़ती प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए इसके अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लेना चाहिए। राष्ट्रीय हिंदी दिवस के अवसर हम हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प ले हिंदी को समृद्ध एवं सुदृढ राष्ट्रीय आधार प्रदान करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करें, यही प्रत्येक भारतीय की इच्छ-आकांक्षा एवं चिर अभिलाषा है।

    डिजिटल हिंदी राजभाषा वैश्विक हिंदी हिंदी दिवस हिंदी भाषा
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Article13 वर्षीय छात्रा से सालभर यौन शोषण का आरोप, एमआर गिरफ्तार
    Next Article बेगूसराय के दियारा क्षेत्र में अब भी 3 से 5 फुट बाढ़ का पानी, नाव से आवागमन को मजबूर लोग

    Related Posts

    ब्रिक्स में भारत की कूटनीतिक धमक, अब घोषणापत्र नहीं परिणाम की बारी

    September 14, 2026

    बेगूसराय के दियारा क्षेत्र में अब भी 3 से 5 फुट बाढ़ का पानी, नाव से आवागमन को मजबूर लोग

    September 14, 2026

    13 वर्षीय छात्रा से सालभर यौन शोषण का आरोप, एमआर गिरफ्तार

    September 14, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    ब्रिक्स में भारत की कूटनीतिक धमक, अब घोषणापत्र नहीं परिणाम की बारी

    बेगूसराय के दियारा क्षेत्र में अब भी 3 से 5 फुट बाढ़ का पानी, नाव से आवागमन को मजबूर लोग

    संचार युग में हिंदी भाषा की बढ़ती प्रतिष्ठा

    13 वर्षीय छात्रा से सालभर यौन शोषण का आरोप, एमआर गिरफ्तार

    Hindi Diwas: हिंदी को मंच नहीं, अवसर चाहिए – कृति आरके जैन

    भगवान गणेश : मंगल, समृद्धि और विकसित भारत के प्रेरणास्रोत

    कोल ट्रांसपोर्टिंग सड़क निर्माण में कथित अनियमितता मामला, झामुमों के दिग्गज नेता मनोज चंद्रा की पहल का ग्रामीणों ने किया स्वागत

    सेवा विस्तार खत्म, फिर भी काम कर रहे रेंजर-एसीएफ ! चतरा मामले में पीसीसीएफ ने मांगा जवाब

    खून से सनी बाइक पर प्रेमिका का शव, ठिकाने लगाने निकला प्रेमी गिरफ्तार

    चार पुनर्वास स्थलों पर समस्याओं का अंबार, विस्थापित बोले- अब आश्वासन नहीं समाधान चाहिए

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.