लेखक: इंद्र यादव
भिवंडी के नारपोली थाना क्षेत्र में 13 वर्षीय छात्रा से सालभर यौन शोषण का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी 26 वर्षीय मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) अमित प्रजापती को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
13 वर्षीय छात्रा से सालभर यौन शोषण: पुलिस ने दर्ज किया केस
भिवंडी के नारपोली थाना क्षेत्र में आठवीं कक्षा की 13 वर्षीय छात्रा के साथ करीब एक साल तक यौन शोषण किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप रिश्ते के परिचित 26 वर्षीय मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) अमित प्रजापती पर है। घटना सामने आने के बाद आरोपी ने कथित तौर पर परिवार को धमकाकर मामला दबाने के लिए छह लाख रुपये देने की कोशिश की। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. बिनू वर्गीस के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, पीड़िता ठाणे पश्चिम के मानपाड़ा क्षेत्र के एक स्कूल में पढ़ती है। आरोप है कि अमित ने परिचय का फायदा उठाकर उसे डराया-धमकाया और पिछले एक वर्ष से उसका यौन शोषण करता रहा। परिवार को घटना की जानकारी मिलने पर आरोपी ने कथित रूप से कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए उन्हें धमकाया और छह लाख रुपये देकर समझौते का दबाव बनाया।
सदमे में आए परिवार ने परिचितों के माध्यम से डॉ. बिनू वर्गीस से संपर्क किया। उन्होंने पुलिस प्रशासन से संपर्क कर मामले में कार्रवाई की मांग की। इसके बाद नारपोली पुलिस ने BNS की संबंधित धाराओं और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस आरोपी को अदालत में पेश करने की प्रक्रिया में जुटी है। साथ ही मामले की जांच करते हुए यह पता लगाया जा रहा है कि घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है। नाबालिग पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी गई है।
पॉक्सो अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई
पॉक्सो (POCSO) अधिनियम 2012 नाबालिगों के यौन शोषण के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान करता है। इस अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर न्यूनतम 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। नारपोली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो की धाराएं भी लगाई हैं, जिससे आरोपी को कड़ी सजा मिलने की संभावना बढ़ गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका अहम
इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. बिनू वर्गीस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय रही। उन्होंने पीड़ित परिवार को कानूनी सहायता प्रदान की और पुलिस पर दबाव बनाकर एफआईआर दर्ज करवाई। ऐसे मामलों में अक्सर परिवार डर के कारण चुप रह जाते हैं, लेकिन जागरूक नागरिकों और एनजीओ की मदद से न्याय की राह आसान होती है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) भी ऐसे मामलों में निगरानी रखता है। अधिक जानकारी के लिए NCPCR की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
पुलिस ने जनता से अपील की है कि यदि किसी को भी बाल यौन शोषण की जानकारी मिले तो तुरंत चाइल्डलाइन 1098 या स्थानीय पुलिस को सूचित करें। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

