चार पुनर्वास स्थलों पर समस्याओं का अंबार, विस्थापित बोले- अब आश्वासन नहीं समाधान चाहिए
राष्ट्र संवाद संवाददाता
चांडिल,। चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच के बैनर तले रविवार को कटिया पुनर्वास स्थल के फुटबॉल मैदान में एकदिवसीय बैठक हुई। इसमें कटिया, छोटालाखा-ए, छोटालाखा-बी और तारकुआंग (मानिकुई) पुनर्वास स्थल के सैकड़ों विस्थापित शामिल हुए। बैठक में पुनर्वास स्थलों की वर्षों पुरानी समस्याओं पर चर्चा कर उनके स्थायी समाधान की मांग उठाई गई।
विस्थापितों ने अवैध प्लॉट कब्जा, श्मशान घाट की जमीन की बिक्री, जमीन का पट्टा नहीं मिलने, आय-जाति और आवासीय प्रमाण पत्र नहीं बनने, सड़क-नाली व पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। वक्ताओं ने कहा कि विकास परियोजना के लिए जमीन और घर छोड़ने के वर्षों बाद भी विस्थापितों को सम्मानजनक पुनर्वास और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।
एकजुट होकर अधिकार की लड़ाई लड़ने का आह्वान
बैठक में मंच के सदस्यों ने कहा कि विस्थापितों की समस्याएं किसी एक गांव या व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे विस्थापित समाज के अधिकार और सम्मान से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि जायज मांगों के लिए एकजुट होकर शांतिपूर्ण और लगातार आंदोलन करने से ही समस्याओं का समाधान संभव है।
मंच ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना उद्देश्य नहीं है। लक्ष्य विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा और लंबित समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है। विस्थापितों ने कहा कि वर्षों से केवल आश्वासन मिल रहा है, अब समयबद्ध और धरातल पर दिखाई देने वाला समाधान चाहिए।
बैठक में जगन्नाथ किस्कु, बीरबल प्रमाणिक, सूरज मुर्मू, अंजू मछुआ, मंगली किस्कु, पूनम देवी, मंजू देवी, सोनिया देवी, बंकिम चंद्र सिंह सरदार, राकेश रंजन महतो, नारायण गोप, श्यामल माडीं, गणेश मंडल, हरेकृष्ण महतो, मनोहर महतो, सागर महतो, शैलेंद्र महतो, मंजू गोराई समेत सैकड़ों विस्थापित मौजूद थे।

