सेवा विस्तार खत्म, फिर भी काम कर रहे रेंजर-एसीएफ ! चतरा मामले में पीसीसीएफ ने मांगा जवाब
बिना आदेश दूसरे प्रक्षेत्र में काम कराने पर सवाल, चार प्रक्षेत्रों में पदस्थापन नहीं, फिर भी चल रहा काम
वित्तीय अधिकार के इस्तेमाल पर भी उठे सवाल? वन अग्रिम से राशि देने पर भी स्पष्टीकरण
राष्ट्र संवाद संवाददाता
रांची/चतरा: वन विभाग में सेवानिवृत्ति के बाद भी अधिकारियों से काम लेने और बिना सक्षम प्राधिकार के आदेश के वन क्षेत्र पदाधिकारियों (एफआरओ) को अतिरिक्त प्रक्षेत्र का प्रभार देने का मामला सामने आया है। ऐसे अधिकारियों द्वारा वित्तीय अधिकारों का इस्तेमाल किये जाने की शिकायतों को विभाग ने गंभीरता से लिया है। चतरा वन प्रमंडल से जुड़े मामले में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) ने क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (आरसीसीएफ) से स्पष्टीकरण मांगा है।
*बिना आदेश दूसरे प्रक्षेत्र में काम कराने पर सवाल…!*
पीसीसीएफ ने आरसीसीएफ से पूछा है कि सक्षम प्राधिकार के आदेश के बिना किन परिस्थितियों में वन क्षेत्र पदाधिकारियों से उनके निर्धारित अधिकार क्षेत्र से बाहर काम कराया जा रहा है। ऐसे प्रक्षेत्रों में मजदूरी और सामग्री के भुगतान के लिए वन अग्रिम के माध्यम से राशि उपलब्ध कराने को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने पूरे राज्य में सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षकों (एसीएफ) और वन क्षेत्र पदाधिकारियों (रेंजर) से सेवा अवधि समाप्त होने के बाद भी काम लिए जाने की शिकायतों की जांच कराने का निर्देश दिया है। विभागीय सचिव के आदेश के बाद अवर सचिव भन्नू चौधरी ने पीसीसीएफ को पत्र भेजकर ऐसे अधिकारियों को चिह्नित करने और तत्काल इस तरह की व्यवस्था पर रोक लगाने को कहा है।
*चार प्रक्षेत्रों में पदस्थापन नहीं, फिर भी चल रहा काम…?*
चतरा उत्तरी वन प्रमंडल के मामले में पीसीसीएफ कार्यालय ने 10 सितंबर को आरसीसीएफ और संबंधित वन प्रमंडल पदाधिकारी से जवाब मांगा है। पत्र के अनुसार राजपुर वन प्रक्षेत्र, कुंदा वन प्रक्षेत्र, चतरा वनरोपण प्रक्षेत्र और हंटरगंज वनरोपण प्रक्षेत्र में संबंधित वन क्षेत्र पदाधिकारी का पदस्थापन नहीं है। इसके बावजूद इन प्रक्षेत्रों का काम कराया जा रहा है। खास बात यह है कि सक्षम प्राधिकार की ओर से किसी दूसरे वन क्षेत्र पदाधिकारी को इन प्रक्षेत्रों का अतिरिक्त प्रभार देने का आदेश भी जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद काम कराये जाने को लेकर विभाग ने जवाब तलब किया है।
*वित्तीय अधिकार के इस्तेमाल पर भी उठे सवाल…?*
अवर सचिव के पत्र में कहा गया है कि ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि सेवा समाप्त हो चुके सेवानिवृत्त एसीएफ और वन क्षेत्र पदाधिकारियों से भी काम लिया जा रहा है। आरोप है कि ऐसे अधिकारी वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। विभाग ने इसे नियमों के अनुरूप नहीं माना है। पत्र में यह भी कहा गया है कि ऐसी स्थिति में भ्रष्टाचार, सरकारी धन के गबन और पद के दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मामला केवल अतिरिक्त प्रभार देने तक सीमित नहीं है। पीसीसीएफ के पत्र में इन प्रक्षेत्रों में चल रहे कार्यों के लिए मजदूरों की मजदूरी और सामग्री खरीद के लिए राशि उपलब्ध कराने का भी उल्लेख है।
*वन अग्रिम से राशि देने पर भी स्पष्टीकरण…!*
पीसीसीएफ को दी गई जानकारी के अनुसार प्रतापपुर वन प्रक्षेत्र और हंटरगंज वन प्रक्षेत्र को वन अग्रिम के माध्यम से राशि उपलब्ध कराई गई है। पीसीसीएफ ने इस व्यवस्था पर भी सवाल उठाया है। पत्र में कहा गया है कि इस संबंध में उनके स्तर पर कोई प्रस्ताव नहीं आया है। ऐसे में बिना सक्षम आदेश के वन प्रमंडल पदाधिकारी वन क्षेत्र पदाधिकारियों को उनके निर्धारित अधिकार क्षेत्र से बाहर काम नहीं दे सकते और न ही वन अग्रिम उपलब्ध करा सकते हैं। इसी बिंदु पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।
*रेंजर-एसीएफ की कमी के कारण मिलता रहा सेवा विस्तार…!*
वन विभाग में रेंजर और एसीएफ की कमी को देखते हुए सरकार पहले सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को छह-छह माह का सेवा विस्तार देती रही है। हालांकि, वर्तमान में सरकार ने इस तरह का सेवा विस्तार देना बंद कर दिया है। इसके बावजूद सेवानिवृत्ति के बाद अधिकारियों से काम लिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
