शिक्षकों का सम्मान, शिक्षा का उत्थान
जमशेदपुर की शिक्षा व्यवस्था बदहाल, 21% स्कूलों में कंप्यूटर नहीं, 60% के पास जमीन तक नहीं
सरयू राय ने आंकड़ों के जरिए खोली शिक्षा व्यवस्था की पोल, बोले—नींव कमजोर होगी तो नई शिक्षा नीति क्या करेगी?
कुलपतियों ने भी माना, गुरु-शिष्य संवाद में आई कमी; एआई, मशीन लर्निंग और रोजगारपरक शिक्षा पर जोर
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत है। जमशेदपुर के 21 प्रतिशत प्राथमिक विद्यालयों में कंप्यूटर नहीं, 41 प्रतिशत में पुस्तकालय नहीं, 60 प्रतिशत विद्यालयों के पास जमीन नहीं, 33 प्रतिशत में बाउंड्री और 75 प्रतिशत में स्मार्ट बोर्ड नहीं हैं। ये आंकड़े जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने डीबीएमएस हाई स्कूल के कलाकृति प्रेक्षागृह में आयोजित ‘शिक्षकों का सम्मान, शिक्षक का उत्थान’ कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने और बुनियादी सुविधाओं की कमी से शिक्षा प्रभावित हो रही है। जब नींव ही कमजोर होगी, तो नई शिक्षा नीति क्या करेगी? पहले बुनियादी व्यवस्था मजबूत करनी होगी।

कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अंजिला गुप्ता ने कहा कि शिक्षा ही देश के विकास का आधार है। शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ बेहतर संवाद कायम करने के साथ एआई और मशीन लर्निंग जैसी नई तकनीकों के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा। नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार सिंह ने भी गुरु-शिष्य संवाद में आई कमी को शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होने का एक कारण बताया और स्कूलों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत जताई।
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधर ने शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के लिए एडवांस लेबोरेटरी प्रोग्राम चलाने पर जोर दिया। सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा कि समाज में मेधावी लोगों और शिक्षकों का सम्मान नहीं होगा, तो प्रतिभाएं राह भटक जाएंगी। उन्होंने शिक्षा को विद्यार्थी-केंद्रित बनाने और शिक्षकों के अनावश्यक तबादलों पर रोक लगाने की आवश्यकता बताई।

विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्रभूषण शर्मा ने शिक्षकों को समय पर वेतन देने और शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के वेतन में देरी होती है, जबकि चुनावी योजनाओं के लिए हर माह राशि की व्यवस्था कर ली जाती है। उन्होंने झारखंड से जेआरएफ अभ्यर्थियों की कमी पर भी चिंता जताई।
युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की कमियों को समझने और उनके समाधान के लिए ऐसे कार्यक्रम राज्य के सभी 24 जिलों में आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत बताई। कार्यक्रम का स्वागत भाषण स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट के ट्रस्टी अशोक गोयल ने दिया। मंच संचालन डॉ. मुदिता चंद्र ने किया तथा आभार प्रदर्शन नेचर फाउंडेशन के ट्रस्टी अंशुल शरण ने किया।
तीन तकनीकी सत्रों में शिक्षा की चुनौतियों पर चर्चा
कार्यक्रम के तहत तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा से संबंधित पहले सत्र में डॉ. अशोक कुमार सिंह, शशि भूषण दुबे, अंजनी कुमार, मनोज कुमार, डॉ. अमर कुमार सिंह की अस्वस्थता के कारण उनके शोधपत्र को पढ़ने वाले कृष्ण कुमार सिंह, डॉ. उदित नारायण, डॉ. प्रियंका झा और मेरी ऐन प्रिया ने अपने विचार एवं शोधपत्र प्रस्तुत किए। इसके बाद प्रश्नोत्तर सत्र हुआ।
दूसरा सत्र उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा छात्र-युवा असंतोष पर केंद्रित रहा। इसकी अध्यक्षता प्रो. रागिनी भूषण ने की। इसमें डॉ. ज्योति प्रकाश, पामेला घोष दत्ता, डॉ. मनोज कुमार और हेमंत पाठक ने भाग लिया। संचालन डॉ. पुष्पा कुमारी ने किया।
तीसरे और समापन सत्र की अध्यक्षता विधायक सरयू राय ने की, जबकि मुख्य अतिथि रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभूनाथ चौधरी थे। संचालन चंद्रदीप पांडेय ने किया। डॉ. जूही समर्पिता ने विभिन्न सत्रों में वक्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों का सार प्रस्तुत किया। सरयू राय ने कहा कि शिक्षा संबंधी नियमावली नहीं बनने से आवश्यकता आधारित शिक्षकों के सिर पर नौकरी जाने का भय बना रहता है। उन्होंने सरकार से नियमावली बनाने की मांग की। शंभूनाथ चौधरी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में कौशल विकास की कमी के कारण बड़ी संख्या में स्नातक रोजगार के योग्य नहीं बन पा रहे हैं। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर भी जोर दिया।

युवती की जान बचाने वाले जामू शेख और शुभम सम्मानित
कार्यक्रम शुरू होने से पहले सरयू राय ने जिउतिया पर्व के दौरान स्वर्णरेखा नदी में डूब रही दो युवतियों में से एक को बचाने वाले जामू शेख को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। हवा वाली मिठाई बेचने वाले जामू शेख ने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगाकर युवती की जान बचाई थी। हादसे के बाद लोगों से लगातार फोन कर मदद की गुहार लगाने वाले शुभम को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान सभागार तालियों से गूंज उठा।
शिक्षकों की रही उल्लेखनीय भागीदारी
स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट और नेचर फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सुबह से अंत तक सैकड़ों शिक्षक मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंतिम चरण में विधायक सरयू राय ने उपस्थित शिक्षकों को सम्मानित किया। आयोजन को सफल बनाने में पवन सिंह, नवनीत सिंह, अमृता मिश्रा, राघवेंद्र सिंह, सुनीता सिंह, प्रेम सक्सेना, प्रवीण सिंह, शिरीन अख्तर, विकास साहनी, सुधीर सिंह, नीरज सिंह, तारक मुखर्जी, मनोज सिंह, अशोक कुमार और आदित्य मुखर्जी सहित अन्य लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

