राष्ट्र संवाद संवाददाता
चांडिल/सरायकेला-खरसावां:
जिले के चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत मिरुडीह में अवैध अंग्रेजी शराब फैक्ट्री के उद्भेदन के बाद अब पूरा मामला सवालों के घेरे में आ गया है। उत्पाद विभाग की कार्रवाई पर लीपापोती और मिलीभगत के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
बताया जा रहा है कि उत्पाद विभाग की लापरवाही और संरक्षण में लंबे समय से शराब माफिया खुलेआम कारोबार कर रहे थे, जिससे सरकार को रोजाना लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था।
छापेमारी हुई, लेकिन गिरफ्तारी नहीं!
मंगलवार को पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां उत्पाद विभाग की संयुक्त टीम ने मिरुडीह में अवैध अंग्रेजी शराब फैक्ट्री पर छापेमारी की। यह कार्रवाई उत्पाद पदाधिकारी अरुण मिश्रा की सूचना पर की गई थी।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि फैक्ट्री का भंडाफोड़ होने के बावजूद संचालकों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? इसी बात को लेकर विभाग की कार्यशैली पर उंगलियां उठ रही हैं।
तीन दिन पहले मिली थी बड़ी जानकारी
सूत्रों के अनुसार, तीन दिन पूर्व एक टेंपो में अवैध शराब को जमशेदपुर में पकड़ा गया था। चालक से मिली जानकारी के आधार पर ही मिरुडीह में छापेमारी की गई।
इसके बावजूद मुख्य आरोपी फरार कैसे हो गए, यह सवाल अब भी बना हुआ है।
उत्पाद विभाग पर संरक्षण का आरोप
जिले के एक विवादित उत्पाद दारोगा अखिलेश कुमार पर पहले से ही अवैध वसूली और शराब माफियाओं को संरक्षण देने के आरोप लगते रहे हैं।
सूत्रों का दावा है कि उनके कथित सहयोगी—मनोहर महतो (सरायकेला) और दीपक सरदार (होमगार्ड जवान)—अवैध शराब कारोबारियों से वसूली कर उन्हें संरक्षण दे रहे थे।
ये लोग आदित्यपुर, चांडिल समेत कई इलाकों में सक्रिय बताए जा रहे हैं।
तीन महीने से चल रहा था बड़ा खेल
मिरुडीह में पिछले तीन महीनों से बड़े पैमाने पर अवैध शराब का उत्पादन किया जा रहा था। हरियाणा से कच्चा माल मंगाया जाता था और तैयार शराब को जमशेदपुर के सीमावर्ती इलाकों—बोड़ाम, आसनबनी, कपाली, डोम्बो ब्रिज, तमाड़, ईचागढ़, सरायकेला, चक्रधरपुर तक सप्लाई किया जाता था।
निर्दोषों को उठाया, फिर छोड़ा क्यों?
छापेमारी के दौरान रात करीब 2 बजे, छापास्थल से 500 मीटर दूर प्रकाश साव, धीरज सिंह और अशोक दास को हिरासत में लिया गया।
लेकिन 6 घंटे बाद उन्हें छोड़ दिया गया। सवाल उठता है कि उन्हें पकड़ा क्यों गया और छोड़ा किस आधार पर गया? क्या मुखिया का आदेश ही अब कानून बन गया है? लाखों की बंदरबांट का आरोप
सूत्रों के अनुसार, संरक्षण के नाम पर लाखों रुपये की बंदरबांट हो रही थी। बताया जा रहा है कि उच्च अधिकारियों के दबाव में कार्रवाई तो हुई, लेकिन स्थानीय स्तर पर माफियाओं को बचा लिया गया।

