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    यूसीआईएल में रोटेशन नीति पर उठे सवाल, संवेदनशील पदों पर वर्षों से जमे अधिकारियों को लेकर चर्चा तेज

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarMarch 10, 2026No Comments3 Mins Read
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    यूसीआईएल में रोटेशन नीति पर उठे सवाल, संवेदनशील पदों पर वर्षों से जमे अधिकारियों को लेकर चर्चा तेज

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    जादूगोड़ा:यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) में संवेदनशील पदों पर लंबे समय से जमे अधिकारियों को लेकर रोटेशन नीति पर सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारियों और सूत्रों के अनुसार हाल के महीनों में कुछ विभागों में तबादले जरूर किए गए हैं, लेकिन कई ऐसे पद हैं जहां अधिकारी 15 से 20 वर्षों से एक ही स्थान या विभाग में बने हुए हैं। इससे कंपनी में प्रशासनिक पारदर्शिता और समानता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    सूत्रों का कहना है कि यूसीआईएल के परचेज विभाग में प्रवीण पाल पिछले करीब 20 वर्षों से पदस्थापित बताए जाते हैं। वहीं भाटिन माइंस में एस.के. सिंह लगभग 15 वर्षों से एक ही पद पर बने हुए हैं, जबकि संपदा विभाग के अधिकारी दिलीप कुमार मंडल भी करीब दो दशकों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। कर्मचारियों का कहना है कि इतने लंबे समय तक एक ही पद पर बने रहने से कार्य प्रणाली की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि जब यूसीआईएल सीएमडी के पूर्व पीए सुरोजित दास का तबादला किया जा सकता है, तो फिर अन्य लंबे समय से जमे अधिकारियों पर समान नीति क्यों लागू नहीं की जा रही। यूनियन से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि परचेज, फाइनेंस, कार्मिक और खनन जैसे विभाग प्रशासनिक दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं और इन पदों पर निर्धारित अवधि के बाद रोटेशन या स्थानांतरण होना जरूरी होता है।

    कर्मचारियों का तर्क है कि यदि रोटेशन नीति कुछ विभागों में लागू की जा रही है और कुछ पदों को इससे बाहर रखा जा रहा है, तो यह समानता के सिद्धांत पर भी सवाल खड़ा करता है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुसार समान परिस्थितियों में सभी पर समान नियम लागू होना चाहिए।

    हालांकि हाल के समय में यूसीआईएल प्रबंधन द्वारा कई अधिकारियों के तबादले किए गए हैं, जिसे प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम माना जा रहा है। इसके बावजूद कर्मचारियों का कहना है कि रोटेशन नीति को पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए इसे सभी संवेदनशील पदों पर समान रूप से लागू करना आवश्यक है।

    अब कर्मचारियों और यूनियनों की नजर यूसीआईएल प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी है कि क्या कंपनी रोटेशन नीति को व्यापक रूप से लागू कर प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता को और मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।

    यूसीआईएल में रोटेशन नीति पर उठे सवाल संवेदनशील पदों पर वर्षों से जमे अधिकारियों को लेकर चर्चा तेज
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