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    Home » यूसीआईएल में नियमों की अनदेखी पर राष्ट्रपति सचिवालय का संज्ञान, डीएई ने मांगा जवाब
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    यूसीआईएल में नियमों की अनदेखी पर राष्ट्रपति सचिवालय का संज्ञान, डीएई ने मांगा जवाब

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarOctober 4, 2025No Comments4 Mins Read
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    यूसीआईएल में नियमों की अनदेखी पर राष्ट्रपति सचिवालय का संज्ञान, डीएई ने मांगा जवाब

     

    राष्ट्र संवाद मुख्य संवाददाता

    जादूगोड़ा: यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के कार्मिक विभाग में वर्षों से जारी मनमानी और नियमों की अनदेखी पर अब शिकंजा कसना शुरू हो गया है। राष्ट्रपति सचिवालय ने एक शिकायत पर गंभीर संज्ञान लेते हुए डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (डीएई) से विस्तृत जवाब तलब किया है। इसके बाद यूसीआईएल प्रबंधन ने ट्रांसफर नीति और सतर्कता नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई शुरू कर दी है।

    नियम क्या कहते हैं और यूसीआईएल में हो रहा उलट

    केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी अधिकारी को संवेदनशील या विजिलेंस-संबंधी पद पर तीन वर्ष से अधिक नहीं रखा जा सकता।

    विशेष परिस्थितियों में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से यह अवधि अधिकतम पाँच वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है।

    DoPT कार्यालय ज्ञापन (2014) और CVC सर्कुलर (2007, 2008, 2013) में स्पष्ट कहा गया है कि किसी अधिकारी को एक ही इकाई में लंबे समय तक रखने से पारदर्शिता और सतर्कता प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है—इसे विजिलेंस लैप्स माना जाएगा।

    इसके बावजूद यूसीआईएल में कई अधिकारी 15 से 20 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। यह निवारक सतर्कता के मूल सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।

     

    20 वर्षों से एक ही पद पर सीएमडी के पीए सुरोजीत दास

    सूत्रों के अनुसार, यूसीआईएल के सीएमडी के निजी सहायक सुरोजीत दास पिछले 20 वर्षों से एक ही संवेदनशील पद पर तैनात हैं। कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि उन्हें पूर्व व वर्तमान प्रबंधन की मिलीभगत से जानबूझकर उसी पद पर बनाए रखा गया, ताकि गोपनीय फाइलों और सूचनाओं पर उनका नियंत्रण बना रहे।

    इसी तरह, सुशील कुमार सिंह (भाटिन यूनिट, मैकेनिकल विभाग) और दिलीप कुमार मंडल (संपदा विभाग) भी 15 वर्षों से अधिक समय से एक ही पद पर कार्यरत हैं—जबकि DoPT और CVC के निर्देश स्पष्ट रूप से अधिकतम पाँच वर्ष की सीमा तय करते हैं।

     

    सीएमडी की शह से नियम तोड़ने का आरोप

    कर्मचारियों का आरोप है कि कार्मिक विभाग में ट्रांसफर नीति सिर्फ कागजों तक सीमित है। सीएमडी की शह पर कुछ पसंदीदा अधिकारियों को वर्षों से अपने पदों पर बनाए रखा गया है। इन अधिकारियों को लगातार वही जिम्मेदारियां देकर भर्ती, प्रमोशन और ठेका प्रक्रियाओं में अप्रत्यक्ष प्रभाव बनाए रखने का मौका दिया गया। यह स्थिति CVC के अध्याय–2 (Preventive Vigilance) के मूल उद्देश्य के विपरीत है।

     

    राष्ट्रपति सचिवालय ने लिया संज्ञान

    राजस्थान स्थित रोहिल प्रोजेक्ट के सुपरिंटेंडेंट (भूविज्ञान) डॉ. ए.एस.सी. श्रीधर बाबू द्वारा की गई शिकायत के बाद यह मामला राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली तक पहुँचा। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि यूसीआईएल में ट्रांसफर नीति की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, भर्ती नियमों का उल्लंघन हो रहा है और कुछ अधिकारियों को जानबूझकर वर्षों तक एक ही पद पर बनाए रखा गया है।

    राष्ट्रपति सचिवालय ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए मामले को डीएई को अग्रेषित किया और कठोर सतर्कता जांच के निर्देश दिए।

     

    कार्रवाई की शुरुआत

    नवनियुक्त सीएमडी डॉ. कंचन आनंद राव ने पदभार ग्रहण करते ही चार अधिकारियों का स्थानांतरण कर कार्रवाई की शुरुआत की है।

    इनमें शामिल हैं—

     

    गिरीश गुप्ता (तुरामडीह से जादूगोड़ा),

     

    स्टेलिन हेंब्रम (नरवापहाड़ से तुरामडीह),

     

    डी. हांसदा (जादूगोड़ा से नरवापहाड़),

     

    आर.के. सिंह (एमटीसी नरवापहाड़ के प्रभारी)।

     

     

    सूत्रों के मुताबिक यह सिर्फ पहला चरण है, और आने वाले दिनों में वरिष्ठ स्तर पर भी बड़े पैमाने पर फेरबदल और जांच की संभावना है।

     

    सवाल बड़ा है — नियम हैं तो पालन क्यों नहीं?

    जब DoPT और CVC के नियम स्पष्ट रूप से हर तीन से पाँच वर्ष में पदस्थापन परिवर्तन का निर्देश देते हैं, तो फिर सुरोजीत दास, सुशील कुमार सिंह और दिलीप कुमार मंडल जैसे अधिकारी दशकों से एक ही पद पर कैसे टिके हुए हैं?

    क्या इसके पीछे प्रबंधन की मिलीभगत और निजी हितों की रक्षा का प्रयास है?

    राष्ट्रपति सचिवालय के हस्तक्षेप के बाद यूसीआईएल में जो हलचल मची है, वह इस बात का संकेत है कि वर्षों से जमी जड़ें अब हिल रही हैं।

    हालांकि असली सुधार तभी माना जाएगा जब 20 वर्षों से एक ही कुर्सी पर बैठे अधिकारी और उन्हें संरक्षण देने वाले अफसर दोनों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

     

    शिकायतकर्ता डॉ. श्रीधर बाबू ने कहा, “यूसीआईएल में वर्षों से प्रमोशन और ट्रांसफर पॉलिसी में भारी अनियमितताएं जारी हैं। अब जब राष्ट्रपति सचिवालय ने कार्रवाई शुरू की है, उम्मीद है कि पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।”

    डीएई ने मांगा जवाब यूसीआईएल में नियमों की अनदेखी पर राष्ट्रपति सचिवालय का संज्ञान
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