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    Home » खनन पट्टी में नदियों पर प्रदूषण का दबाव
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    खनन पट्टी में नदियों पर प्रदूषण का दबाव

    News DeskBy News DeskOctober 6, 2026No Comments2 Mins Read
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    Jamshedpur News | Rashtra Samvad
    Rashtra Samvad
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    खनन पट्टी में नदियों पर प्रदूषण का दबाव

     

    *जोडा-बड़बिल से सारंडा तक जलस्रोतों की नियमित निगरानी और जांच की मांग*

     

    राष्ट्र संवाद संवाददाता, बड़बिल

     

    लौह अयस्क खनन क्षेत्र में नदियों और जलस्रोतों पर खनन गतिविधियों के असर को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। बैतरनी नदी, कुसेई, कुंद्रा नाला और कोइना क्षेत्र के जलस्रोतों में खनन से निकलने वाले गाद, ओवरबर्डन और लाल मिट्टी के बहाव को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है।

     

    आधिकारिक आंकड़े भी इस क्षेत्र में लगातार निगरानी की जरूरत बताते हैं। ओडिशा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 2023 के आंकड़ों में जोडा़ के कुंद्रा नाला, देवगांव के कुसेई और बैतरनी के विभिन्न केंद्रों पर जल गुणवत्ता की जांच दर्ज है। वहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों में बैतरनी के साथ कुसेई को प्रमुख सहायक नदी के रूप में दर्ज किया गया है। पुराने अध्ययनों में जोडा़ क्षेत्र में खनन गतिविधियों के कारण जल गुणवत्ता पर दबाव तथा लौह तत्व की अधिकता भी दर्ज की गई है।

     

    स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान खदानों और ओवरबर्डन क्षेत्रों से बहकर आने वाला लाल रंग का पानी नालों और नदियों तक पहुंचता है। ऐसे में जलस्रोतों में तलछट, लौह तत्व और अन्य खनिजों की स्थिति की वैज्ञानिक जांच जरूरी है। पर्यावरण विशेषज्ञों की राय में केवल नदी के मुख्य प्रवाह की जांच पर्याप्त नहीं, बल्कि खदानों से निकलने वाले ड्रेनेज, सेटलिंग पोंड और आसपास के नालों की भी नियमित मॉनिटरिंग होनी चाहिए।

     

    स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि खनन क्षेत्रों से जुड़े सभी प्रमुख जलस्रोतों की संयुक्त जांच कराई जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खनन गतिविधियों का वास्तविक प्रभाव कहां और कितना है।

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