भारत को नशामुक्त बनाएं: प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से की अपील
नयी दिल्ली, 30 अगस्त (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को देशवासियों से नशे की समस्या के खिलाफ एकजुट होने और युवाओं के लिए मजबूत भविष्य बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि नशे की लत सिर्फ एक व्यक्ति को अपनी चपेट में नहीं लेती, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करती है।
अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में मोदी ने कहा कि ‘विकसित भारत के लिए नशामुक्त युवा’ अभियान पूरे देश में जोर पकड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है ‘नशामुक्त युवा, नशामुक्त भारत।’
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि यह अभियान महज औपचारिकता बनकर नहीं रह गया है, बल्कि बड़ी संख्या में लोग, खासकर युवा इससे जुड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘आखिरकार, यह भारत के युवाओं के स्वास्थ्य, खुशहाली और उज्ज्वल भविष्य के लिए हमारा सामूहिक संकल्प है। आइए, भारत के युवाओं को नशे से दूर रखने और उन्हें नशे की लत से मुक्त करने के इस नेक अभियान में हम सभी अपनी भूमिका निभाएं।’’
मोदी ने कहा कि नशे की लत केवल किसी एक व्यक्ति को अपनी चपेट में नहीं लेती, बल्कि इसके दुष्परिणाम पूरे परिवार और समाज को भुगतने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन लोगों की सराहना करता हूं, जो नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाते हैं और नशे की लत से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए आगे आते हैं।’’
‘नशामुक्त भारत अभियान’ सरकार की प्रमुख पहलों में से एक है। इस अभियान का उद्देश्य जागरूकता फैलाने, समुदाय की भागीदारी, उपचार, पुनर्वास, उपचार के बाद देखभाल और सामाजिक पुनर्वास के माध्यम से नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को रोकना है।
रेहड़ी पटरी वाले लोगों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी ‘पीएम स्वनिधि योजना’ का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह योजना रेहड़ी पटरी लगाने वाली लाखों महिलाओं को अपना कारोबार बढ़ाने, आय बढ़ाने और अपने परिवारों के लिए बेहतर भविष्य बनाने में मदद कर रही है।
उन्होंने बताया कि शहरों और कस्बों की सड़कों पर लाखों महिलाएं सब्जियां और फल बेचने, चाय की दुकान चलाने जैसे कामों में लगी हैं। इनमें कुछ महिलाएं फूल, मिट्टी के दीये और ‘पूजा’ सामग्री भी बेचती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘अक्सर केवल पूंजी की कमी ही उनके कारोबार को आगे बढ़ने से रोकती है। लेकिन अब ऐसी लाखों माताओं और बहनों को ‘पीएम स्वनिधि योजना’ के जरिए नयी ताकत मिल रही है।’’
मोदी ने कहा कि ‘महिला सशक्तीकरण’ का यह पहलू उतनी चर्चा में नहीं आता, जितनी होनी चाहिए, क्योंकि ‘पीएम स्वनिधि योजना’ के लाभार्थियों में करीब 46 प्रतिशत महिलाएं हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इसका मतलब है कि देशभर में करीब 35 लाख महिलाएं इस योजना से जुड़कर अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं।’’
‘पीएम स्वनिधि योजना’ से लाभान्वित गाजियाबाद और बेंगलुरु की दो महिलाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब किसी महिला का कारोबार बढ़ता है, तो उसके साथ पूरे परिवार का भविष्य भी बेहतर होता है।
उन्होंने कहा, ‘‘बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलती है, घर की जरूरतें पूरी होती हैं और महिला का आत्मविश्वास बढ़ता है। यह वास्तव में ‘महिला सशक्तीकरण’ का जीवंत उदाहरण है।’’
मोदी ने कहा कि अगस्त का महीना चारों ओर देशभक्ति के विभिन्न रंग लेकर आता है, क्योंकि इस दौरान हर व्यक्ति के दिल में देश के प्रति प्रेम की भावना और प्रबल हो जाती है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस, भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ और विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस अगस्त के महीने को खास बनाते हैं, जबकि स्वतंत्रता दिवस और राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस हर देशवासी को गर्व से भर देते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान इस भावना को और मजबूत करता है। इस वर्ष यह अवसर और भी खास हो गया है, क्योंकि ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि तिरंगे का यह उत्सव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। इस वर्ष ‘सूर्यपथ तिरंगा’ पहल के जरिए राष्ट्रीय ध्वज ने दुनिया भर में एक अनोखी यात्रा की।
उन्होंने कहा, ‘‘फिजी के सुवा में सूर्योदय की पहली किरण के साथ तिरंगा फहराया गया। इसके बाद एशिया, अफ्रीका और यूरोप में भारतीय दूतावासों और पोस्ट्स पर तिरंगा फहराया गया और अंत में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भी इसे फहराया गया। आप कल्पना कर सकते हैं कि वे दृश्य कितने भव्य रहे होंगे। जैसे-जैसे सूर्य दुनिया का चक्कर लगाता गया, उसके साथ-साथ भारतीय तिरंगा भी फहराता गया।’’
‘मिशन शक्तिसैट’ का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि आज देश की बेटियों के सपने धरती से निकलकर अंतरिक्ष तक उड़ान भर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘और आपको यह जानकर गर्व होगा कि भारत दुनिया भर की ऐसी हजारों बेटियों को एक मंच पर ला रहा है, जो ऐसे सपने संजोए हुए हैं। इस पहल का नाम ‘मिशन शक्तिसैट’ है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके तहत 108 देशों की 12,000 छात्राओं को उपग्रह तकनीक सीखने और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस पूरी पहल का लक्ष्य बेहद खास है : एक ऐसे उपग्रह को चंद्रमा की कक्षा में भेजने की तैयारी चल रही है, जिसे पूरी तरह छात्राओं की भागीदारी से विकसित किया जाएगा।’’
अपने रेडियो संबोधन में मोदी ने एवोकाडो की बढ़ती मांग का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि पहले इस फल के बारे में शायद ही कोई जानता था और इसकी कीमत तथा मांग दोनों ही कम थीं। लेकिन आज यह अक्सर लोगों की खाने की मेज पर दिखाई देता है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह स्वास्थ्य और प्रीमियम बाजारों में लोगों की पसंद बन गया है। यह हमारे किसान भाई-बहनों के लिए भी काफी मददगार है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले दूसरी फसलें उगाने वाले कई किसान अब एवोकाडो की खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय कमाने में मदद मिल रही है।
रेडियो संबोधन के दौरान मोदी ने मुंबई निवासी कृष्णा शेषाद्रि की प्रेरणादायक कहानी भी साझा की। उन्होंने एक वेबसाइट शुरू की है, जिस पर भारत के उन कम चर्चित पूर्ववर्ती राज्यों और रियासतों के बारे में जानकारी साझा की जाती है, जो अब अस्तित्व में नहीं हैं।
उन्होंने नगालैंड के फेक जिले के रहने वाले वेसालू पुरो का भी उल्लेख किया, जिन्हें फूलों की खेती से लाभ मिला है। इसके अलावा उन्होंने ओडिशा की मैथिली भूई का जिक्र किया, जो अब वन संरक्षण के काम में जुटी हैं।
प्रधानमंत्री मोदी इस समय उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा पर हैं। ‘मन की बात’ का रेडियो प्रसारण आमतौर पर कुछ दिन पहले रिकॉर्ड किया जाता है और हर महीने के अंतिम रविवार को प्रसारित किया जाता है।

