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    “जनता की बेटी, विधानसभा की बहु—पूर्णिमा दास साहू”

    News DeskBy News DeskSeptember 8, 2025Updated:September 8, 2025No Comments3 Mins Read
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    (जन्मदिन पर विशेष)

    “जनता की बेटी, विधानसभा की बहु—पूर्णिमा दास साहू”

    समर्पण, संघर्ष और स्नेह की मिसाल : विधायक पूर्णिमा दास साहू

    राष्ट्र संवाद डेस्क

    राजनीति अक्सर शक्ति और पद की लड़ाई के रूप में देखी जाती है, लेकिन जब सेवा ही राजनीति का मूल बन जाए तो एक नेता समाज के दिलों में जगह बना लेता है। जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा की बहु विधायक पूर्णिमा दास साहू ऐसी ही नेता हैं, जो सादगी, संघर्ष और स्नेह के अनोखे संगम की जीती-जागती मिसाल हैं।

     

     

    पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की बहु और ललित दास की धर्मपत्नी होने के नाते उनका राजनीतिक जीवन वंशगत पहचान से शुरू हुआ, लेकिन बहुत जल्द ही उन्होंने अपने काम और व्यवहार से जनता का दिल जीतकर यह साबित कर दिया कि नेतृत्व केवल रिश्तों की ताकत पर नहीं, बल्कि जनसेवा की निष्ठा पर खड़ा होता है।

    बचपन से ही सेवा का संस्कार

     

    पूर्णिमा दास साहू के जीवन की सबसे बड़ी शक्ति उनका सरल और अनुशासित स्वभाव है। बचपन से ही परिवार में मिले संस्कारों ने उन्हें यह सिखाया कि समाज और परिवार की जिम्मेदारी हमेशा अपने से ऊपर रखनी चाहिए। यही कारण है कि राजनीति में आने के बाद भी उन्होंने कभी अपनी पहचान को पद या शक्ति से नहीं, बल्कि लोगों की सेवा से बनाया।

    संघर्षों से बनी जननेता

     

    राजनीतिक जीवन आसान नहीं होता। आलोचनाओं, चुनौतियों और विरोध के बीच भी पूर्णिमा दास साहू ने हर परिस्थिति का सामना धैर्य और मुस्कान से किया।
    चाहे बारिश में जर्जर सड़क पर जनता के साथ खड़ी होना हो, या अस्पताल में बीमार महिला की मदद के लिए स्वयं उपस्थित होना—उन्होंने हमेशा यह संदेश दिया कि विधायक होना केवल कुर्सी संभालने का नाम नहीं, बल्कि जनता की तकलीफ को अपनी तकलीफ मानने का नाम है।

    जनता से सीधा जुड़ाव

     

    जमशेदपुर पूर्वी की गलियों में जब भी उनका नाम लिया जाता है, लोग कहते हैं—”पूर्णिमा दीदी तो हमारी अपनी हैं।”
    वे न केवल बड़े मंचों पर भाषण देने वाली नेता हैं, बल्कि घर-घर जाकर आशीर्वाद लेने और समस्याएँ सुनने वाली बहन-बेटी भी हैं। महिलाओं की शिक्षा, युवाओं के रोजगार और गरीब परिवारों की मदद में उनकी गहरी रुचि उन्हें जनता से भावनात्मक रूप से जोड़ती है।

    महिला सशक्तिकरण की आवाज़

    पूर्णिमा दास साहू ने यह सिद्ध किया कि राजनीति पुरुषप्रधान क्षेत्र नहीं है। अपनी निडर आवाज़ और संवेदनशील दृष्टिकोण से वे महिलाओं की प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी कोशिश है कि हर बेटी को शिक्षा मिले, हर महिला आत्मनिर्भर बने और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाए।

    जन्मदिन पर जनता की दुआएँ

    आज जब वे अपना जन्मदिन मना रही हैं, पूरा जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना कर रहा है। लोग उन्हें न सिर्फ़ विधायक, बल्कि अपनी बेटी, बहन और मार्गदर्शक मानते हैं। यही जनता का स्नेह उनका सबसे बड़ा उपहार है।

    पूर्णिमा दास साहू—एक नाम, जो हमें यह याद दिलाता है कि राजनीति पद की नहीं, बल्कि समर्पण, संघर्ष और स्नेह की यात्रा है।

     

    राष्ट्रकवि दिनकर की पंक्तियां के साथ आशीर्वाद

    नखत अमा के बुझते हैं सारा आकाश तुम्हारा है सेनानी तुम प्रयाण करो भावी इतिहास तुम्हारा है

    “जनता की बेटी विधानसभा की बहु—पूर्णिमा दास साहू”
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